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राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting)

राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting) – सम्पूर्ण नोट्स


1. राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting)

परिभाषा: राष्ट्रीय आय लेखांकन वह व्यापक सांख्यिकीय प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वित्तीय वर्ष) के दौरान होने वाली सभी आर्थिक गतिविधियों (उत्पादन, आय और व्यय) को मापा और दर्ज किया जाता है।


2. राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ (Methods of Calculation)

राष्ट्रीय आय की गणना मुख्य रूप से तीन विधियों द्वारा की जाती है। चूँकि अर्थव्यवस्था में उत्पादन = आय = व्यय होता है, इसलिए तीनों विधियों से राष्ट्रीय आय का मान समान आता है।

A. उत्पाद विधि या मूल्य वृद्धि विधि (Value Added Method)

यह विधि उत्पादन के प्रत्येक चरण में उद्यमों द्वारा की गई ‘मूल्य वृद्धि’ को मापती है। इससे ‘दोहरी गणना’ (Double Counting) की समस्या से बचा जा सकता है।

B. आय विधि (Income Method)

इस विधि में उत्पादन के साधनों (श्रम, भूमि, पूंजी, उद्यम) को उनकी सेवाओं के बदले मिलने वाली आय को जोड़ा जाता है। इससे शुद्ध घरेलू आय ($NDP_{FC}$) प्राप्त होती है।

C. व्यय विधि (Expenditure Method)

यह विधि एक लेखा वर्ष के दौरान देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को मापती है।


3. राष्ट्रीय आय के समुच्चय (Aggregates)

राष्ट्रीय आय के अंतर्गत 8 प्रमुख समुच्चय (Aggregates) होते हैं। इन्हें एक-दूसरे में बदलने के लिए तीन मुख्य अवधारणाओं का उपयोग किया जाता है:

  1. सकल (Gross) से शुद्ध (Net): सकल में से मूल्यह्रास (Depreciation/Consumption of Fixed Capital) घटाने पर ‘शुद्ध’ प्राप्त होता है।
  2. घरेलू (Domestic) से राष्ट्रीय (National): घरेलू आय में ‘विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय’ (NFIA – Net Factor Income from Abroad) जोड़ने पर ‘राष्ट्रीय’ आय प्राप्त होती है।
  3. बाजार कीमत (Market Price – MP) से साधन लागत (Factor Cost – FC): बाजार कीमत में से ‘शुद्ध अप्रत्यक्ष कर’ (NIT = अप्रत्यक्ष कर – आर्थिक सहायता/Subsidies) घटाने पर साधन लागत प्राप्त होती है।

8 प्रमुख समुच्चय:


4. मौद्रिक (Nominal) और वास्तविक (Real) GDP

मौद्रिक GDP (Nominal GDP):

जब एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्यांकन चालू वर्ष की कीमतों (Current Prices) पर किया जाता है, तो उसे मौद्रिक GDP कहते हैं।

वास्तविक GDP (Real GDP):

जब एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्यांकन किसी आधार वर्ष की स्थिर कीमतों (Base Year / Constant Prices) पर किया जाता है, तो उसे वास्तविक GDP कहते हैं।

GDP अवस्फीतिकारक (GDP Deflator):

यह अर्थव्यवस्था में औसत कीमत स्तर में होने वाले परिवर्तन को मापता है।


5. GDP और कल्याण (GDP and Welfare)

सामान्यतः यह माना जाता है कि यदि देश का GDP बढ़ रहा है, तो लोगों का कल्याण (जीवन स्तर) भी बढ़ रहा होगा। लेकिन, GDP आर्थिक कल्याण का एक सटीक सूचक नहीं है। इसके निम्नलिखित कारण (सीमाएँ) हैं:

  1. आय का वितरण (Distribution of Income): GDP बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि आय समान रूप से बंटी है। हो सकता है कि देश की अधिकांश संपत्ति कुछ ही अमीरों के पास केंद्रित हो रही हो और गरीब और गरीब हो रहे हों।
  2. गैर-मौद्रिक विनिमय (Non-monetary Exchanges): अर्थव्यवस्था में कई ऐसी गतिविधियाँ होती हैं जिनका मूल्यांकन मुद्रा में नहीं होता (जैसे- गृहिणी द्वारा घर में किया गया काम, या वस्तु-विनिमय प्रणाली)। ये कल्याण तो बढ़ाते हैं लेकिन GDP में शामिल नहीं होते।
  3. बाह्यताएं (Externalities): किसी आर्थिक गतिविधि के वे अच्छे या बुरे प्रभाव जिनके लिए कीमत या जुर्माना नहीं चुकाया जाता।
    • नकारात्मक बाह्यता: कारखानों का धुआं (प्रदूषण) GDP तो बढ़ाता है (उत्पादन बढ़ने से), लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर कल्याण को कम करता है। इसे GDP में घटाया नहीं जाता।
  4. जनसंख्या वृद्धि (Population Growth): यदि GDP वृद्धि दर की तुलना में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है, तो प्रति व्यक्ति आय कम हो जाएगी, जिससे समग्र कल्याण में गिरावट आएगी।
  5. उत्पादों की प्रकृति: यदि GDP में वृद्धि युद्ध सामग्री (हथियारों) के उत्पादन से हो रही है, तो इससे राष्ट्र की सुरक्षा तो मजबूत होती है, लेकिन आम जनता के प्रत्यक्ष कल्याण में वृद्धि नहीं होती।
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