राष्ट्रीय आय और आय का चक्रीय प्रवाह

राष्ट्रीय आय और आय का चक्रीय प्रवाह

भाग 1: आय का चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Income)

अर्थव्यवस्था में उत्पादन, आय और व्यय की प्रक्रिया कभी नहीं रुकती। यह एक चक्र के रूप में निरंतर चलती रहती है, जिसे आय का चक्रीय प्रवाह कहते हैं।

1. चक्रीय प्रवाह के तीन चरण (Phases of Circular Flow)

  1. उत्पादन का चरण (Generation Phase): इस चरण में फर्में (Firms) उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) की मदद से वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती हैं।

  2. आय का चरण (Distribution Phase): उत्पादन प्रक्रिया में योगदान के बदले में फर्मों द्वारा साधन मालिकों (परिवार क्षेत्र) को ‘साधन आय’ (लगान, मजदूरी, ब्याज और लाभ) का भुगतान किया जाता है।

  3. व्यय का चरण (Disposition Phase): परिवार क्षेत्र अपनी आय को वापस फर्मों द्वारा बनाई गई वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने पर खर्च (उपभोग व्यय) कर देता है।

2. प्रवाह के प्रकार (Types of Flow)

  • वास्तविक प्रवाह (Real Flow): यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का प्रवाह है।

    • उदाहरण: परिवार क्षेत्र से फर्मों को साधन सेवाएं (श्रम, भूमि) देना और फर्मों से परिवार क्षेत्र को तैयार वस्तुएं मिलना। इसमें मुद्रा का लेन-देन नहीं होता।

  • मौद्रिक प्रवाह (Money Flow): यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बीच मुद्रा (पैसे) का प्रवाह है।

    • उदाहरण: फर्मों द्वारा परिवारों को साधन आय (मजदूरी, लगान) का भुगतान और परिवारों द्वारा वस्तुओं की खरीद पर किया गया उपभोग व्यय।

3. दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय प्रवाह (Two-Sector Model)

एक सरल अर्थव्यवस्था में हम केवल दो क्षेत्रों को मानते हैं:

  1. परिवार क्षेत्र (Households): यह उत्पादन के साधनों (श्रम, भूमि आदि) का मालिक है और वस्तुओं का उपभोग करता है।

  2. फर्म क्षेत्र (Firms): यह वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करता है।

प्रवाह की प्रक्रिया:

  • परिवार अपनी साधन सेवाएं फर्मों को देते हैं।

  • फर्में इसके बदले परिवारों को साधन आय (लगान, मजदूरी, ब्याज, लाभ) देती हैं।

  • परिवार इस आय का उपयोग फर्मों द्वारा बनाई गई वस्तुओं को खरीदने में करते हैं (उपभोग व्यय)।

  • इस प्रकार, पैसा वापस फर्मों के पास पहुँच जाता है और यह चक्र चलता रहता है। (आय = व्यय = उत्पादन)

4. क्षरण और भरण (Leakages and Injections)

  • क्षरण (Leakages/Withdrawals): आय का वह हिस्सा जो चक्रीय प्रवाह से बाहर निकाल लिया जाता है। इससे अर्थव्यवस्था में मांग और उत्पादन कम होता है। उदाहरण: बचत (Saving), कर (Taxes), आयात (Imports)।

  • भरण (Injections): वह धन जो बाहर से आय के चक्रीय प्रवाह में डाला जाता है। इससे मांग और उत्पादन बढ़ता है। उदाहरण: निवेश (Investment), सरकारी व्यय (Govt. Expenditure), निर्यात (Exports)।


भाग 2: राष्ट्रीय आय की मूलभूत अवधारणाएं (Basic Concepts of National Income)

राष्ट्रीय आय किसी देश की आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है।

परिभाषा: एक लेखा वर्ष (वित्तीय वर्ष) के दौरान किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कुल साधन आय के जोड़ को राष्ट्रीय आय कहा जाता है।

राष्ट्रीय आय को सही ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित अवधारणाओं को समझना आवश्यक है:

1. साधन आय और हस्तांतरण आय (Factor Income vs Transfer Income)

  • साधन आय (Factor Income): वह आय जो उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) को उनकी उत्पादक सेवाओं के बदले मिलती है। जैसे: लगान, मजदूरी, ब्याज, लाभ। (इसे राष्ट्रीय आय में शामिल किया जाता है)।

  • हस्तांतरण आय (Transfer Income): वह आय जो बिना कोई उत्पादक सेवा दिए एकतरफा प्राप्त होती है। जैसे: वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति, दान, पॉकेट मनी। (इसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है, क्योंकि इससे कोई नया उत्पादन नहीं होता)।

2. सामान्य निवासी (Normal Residents)

राष्ट्रीय आय में केवल देश के ‘सामान्य निवासियों’ की आय जोड़ी जाती है।

सामान्य निवासी वह व्यक्ति या संस्था है जो:

  1. उस देश की घरेलू सीमा में सामान्यतः निवास करता है (कम से कम 1 वर्ष से)।

  2. जिसकी आर्थिक रुचि का केंद्र (Centre of economic interest) उसी देश में हो (यानी वह वहीं कमाता, खर्च करता और बचाता हो)।

3. अंतिम वस्तुएं और मध्यवर्ती वस्तुएं (Final vs Intermediate Goods)

  • अंतिम वस्तुएं (Final Goods): वे वस्तुएं जो उत्पादन की सीमा रेखा पार कर चुकी हैं और अपने अंतिम उपभोगकर्ता (उपभोक्ता या निवेशक) द्वारा उपयोग के लिए तैयार हैं। जैसे: घर में इस्तेमाल होने वाला दूध, मशीनरी।

  • मध्यवर्ती वस्तुएं (Intermediate Goods): वे वस्तुएं जिन्हें एक फर्म द्वारा दूसरी फर्म से कच्चे माल के रूप में या उसी वर्ष दोबारा बेचने (Resale) के लिए खरीदा जाता है। जैसे: मिठाई बनाने वाले द्वारा खरीदा गया दूध।

    (नोट: दोहरी गणना की समस्या से बचने के लिए राष्ट्रीय आय में केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य शामिल किया जाता है।)

4. घरेलू आय और राष्ट्रीय आय (Domestic Income vs National Income)

  • घरेलू आय (NDP at FC): एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा के भीतर सृजित कुल साधन आय। इसमें देश के निवासियों और गैर-निवासियों (विदेशियों) दोनों की आय शामिल होती है।

  • राष्ट्रीय आय (NNP at FC): एक लेखा वर्ष में देश के सामान्य निवासियों द्वारा सृजित कुल साधन आय।

घरेलू आय से राष्ट्रीय आय की गणना:

राष्ट्रीय आय = घरेलू आय + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय (NFIA)

(NFIA = देश के निवासियों द्वारा विदेशों से अर्जित आय – विदेशियों द्वारा हमारे देश में अर्जित आय)

5. बाजार कीमत और साधन लागत (Market Price vs Factor Cost)

  • साधन लागत (Factor Cost – FC): किसी वस्तु को बनाने में उत्पादन के साधनों पर किया गया खर्च।

  • बाजार कीमत (Market Price – MP): वह कीमत जिस पर वस्तु बाजार में बेची जाती है। इसमें सरकार द्वारा लगाए गए अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं और सब्सिडी घटा दी जाती है।

सूत्र:

बाजार कीमत (MP) = साधन लागत (FC) + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT)

(NIT = अप्रत्यक्ष कर – आर्थिक सहायता/Subsidy)

6. सकल और शुद्ध (Gross vs Net)

  • सकल (Gross): इसमें पूंजीगत वस्तुओं की घिसावट या मूल्यह्रास (Depreciation) शामिल होता है।

  • शुद्ध (Net): यह वास्तविक मूल्य है जिसमें से मूल्यह्रास को हटा दिया जाता है।

सूत्र:

शुद्ध (Net) = सकल (Gross) – मूल्यह्रास (Depreciation)

यहाँ ‘राष्ट्रीय आय के प्रकार (समुच्चय) और इसे मापने की विधियाँ’ पर परीक्षा की दृष्टि से तैयार किए गए विस्तृत और सुव्यवस्थित नोट्स दिए गए हैं।


राष्ट्रीय आय (National Income)

राष्ट्रीय आय (National Income) किसी देश की आर्थिक स्थिति और प्रगति को मापने का सबसे प्रमुख पैमाना है।

सरल शब्दों में: “एक वित्तीय वर्ष (लेखा वर्ष) के दौरान किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कुल शुद्ध साधन आय (लगान, मजदूरी, ब्याज और लाभ) के जोड़ को राष्ट्रीय आय कहा जाता है।” अर्थशास्त्र की भाषा में इसे साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP_{FC}) कहा जाता है।

राष्ट्रीय आय की गणना और इसके विभिन्न समुच्चयों (जैसे GDP, GNP, NDP) के बीच के संबंध को समझना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसे आसानी से समझने के लिए, मैंने नीचे एक इंटरैक्टिव ‘राष्ट्रीय आय एक्सप्लोरर’ बनाया है।

आप इसमें उपभोग (C), निवेश (I), सरकारी व्यय (G), मूल्यह्रास, और टैक्स जैसे आंकड़ों को बदलकर खुद देख सकते हैं कि कैसे GDP_{MP} (सकल घरेलू उत्पाद) से सफर शुरू होकर राष्ट्रीय आय (NNP_{FC}) तक पहुँचता है:

राष्ट्रीय आय: प्रकार (समुच्चय) और मापन (Measurement) 

भाग 1: राष्ट्रीय आय के प्रकार या संबंधित समुच्चय (Aggregates of National Income)

राष्ट्रीय आय का अध्ययन करते समय हम मुख्य रूप से 8 समुच्चयों (Aggregates) का उपयोग करते हैं। इन्हें तीन बुनियादी अवधारणाओं (सकल/शुद्ध, घरेलू/राष्ट्रीय, और बाज़ार कीमत/साधन लागत) के आधार पर बांटा जाता है।

A. घरेलू उत्पाद के समुच्चय (Domestic Product Aggregates)

यह देश की घरेलू सीमा के भीतर हुए उत्पादन से संबंधित है:

  1. बाज़ार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद ($GDP_{MP}$): एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाज़ार मूल्य। इसमें मूल्यह्रास (Depreciation) शामिल होता है।

  2. बाज़ार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद ($NDP_{MP}$): GDP_{MP} में से मूल्यह्रास को घटाने पर प्राप्त मूल्य। (NDP_{MP} = GDP_{MP} – \text{मूल्यह्रास})

  3. साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP_{FC}): देश की घरेलू सीमा में उत्पादन के साधनों को दिया जाने वाला कुल भुगतान (मूल्यह्रास सहित)।

  4. साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP_{FC}): इसे ‘घरेलू आय’ भी कहा जाता है। यह देश की सीमा के भीतर अर्जित शुद्ध साधन आय है।

B. राष्ट्रीय उत्पाद के समुच्चय (National Product Aggregates)

यह देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित आय से संबंधित है:

5. बाज़ार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP_{MP}): एक लेखा वर्ष में देश के सामान्य निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाज़ार मूल्य। (GNP_{MP} = GDP_{MP} + \text{विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय (NFIA)})

6. बाज़ार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP_{MP}): GNP_{MP} में से मूल्यह्रास को घटाने पर प्राप्त मूल्य।

7. साधन लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP_{FC}): सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित सकल साधन आय।

8. साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP_{FC}): इसे ही ‘राष्ट्रीय आय’ (National Income) कहा जाता है। यह एक देश के निवासियों द्वारा एक वर्ष में अर्जित कुल शुद्ध साधन आय है।


भाग 2: राष्ट्रीय आय मापने की विधियाँ (Methods of Measuring National Income)

राष्ट्रीय आय को मापने की तीन प्रमुख विधियाँ हैं। अर्थव्यवस्था के चक्रीय प्रवाह के कारण, तीनों विधियों से राष्ट्रीय आय का परिणाम (मूल्य) समान आता है।

1. मूल्य वृद्धि विधि या उत्पाद विधि (Value Added Method / Product Method)

इस विधि में अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादक उद्यमों (प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र) द्वारा की गई ‘मूल्य वृद्धि’ का योग करके राष्ट्रीय आय निकाली जाती है।

  • मूल्य वृद्धि (Value Added) क्या है? किसी फर्म द्वारा उत्पादन के मूल्य और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए कच्चे माल (मध्यवर्ती उपभोग) के मूल्य का अंतर।

    सूत्र: \text{मूल्य वृद्धि (GVA_{MP})} = \text{उत्पादन का मूल्य (Value of Output)} – \text{मध्यवर्ती उपभोग (Intermediate Consumption)}

    (नोट: यदि सारा उत्पादन नहीं बिकता है, तो उत्पादन का मूल्य = बिक्री + स्टॉक में परिवर्तन)

  • राष्ट्रीय आय निकालने के चरण:

    1. सभी उद्यमों की सकल मूल्य वृद्धि (GVA_{MP}) जोड़ें \rightarrow इससे GDP_{MP} प्राप्त होगा।

    2. GDP_{MP} में से ‘मूल्यह्रास’ घटाएं और ‘विदेशों से शुद्ध साधन आय’ (NFIA) जोड़ें \rightarrow NNP_{MP} प्राप्त होगा।

    3. NNP_{MP} में से ‘शुद्ध अप्रत्यक्ष कर’ (NIT) घटाएं \rightarrow राष्ट्रीय आय (NNP_{FC}) प्राप्त होगी।

  • सावधानियां: पुरानी (Second-hand) वस्तुओं की बिक्री/खरीद का मूल्य शामिल नहीं किया जाता, लेकिन उन पर दिया गया कमीशन शामिल होता है। स्व-उपभोग के लिए किए गए उत्पादन का आरोपित मूल्य शामिल किया जाता है।

2. आय विधि (Income Method)

इस विधि में एक लेखा वर्ष के दौरान उत्पादन के साधनों (श्रम, भूमि, पूंजी, उद्यम) द्वारा उनकी सेवाओं के बदले प्राप्त की गई आय को जोड़ा जाता है।

  • आय के मुख्य घटक:

    1. कर्मचारियों का पारिश्रमिक (Compensation of Employees): नकद वेतन, किस्म के रूप में मजदूरी, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नियोजकों का योगदान।

    2. परिचालन अधिशेष (Operating Surplus): संपत्ति और उद्यमशीलता से प्राप्त आय। इसमें शामिल हैं: लगान (Rent) + ब्याज (Interest) + लाभ (Profit)

      (लाभ के तीन भाग होते हैं: लाभांश, निगम कर, और अवितरित लाभ)

    3. मिश्रित आय (Mixed Income): स्वरोजगार वाले व्यक्तियों (जैसे- डॉक्टर, किसान, दुकानदार) की आय, जिसमें श्रम और पूंजी दोनों का प्रतिफल मिला होता है।

  • राष्ट्रीय आय निकालने के चरण:

    1. इन तीनों घटकों को जोड़ें \rightarrow इससे घरेलू आय (NDP_{FC}) प्राप्त होगी।

      सूत्र: NDP_{FC} = \text{पारिश्रमिक} + \text{परिचालन अधिशेष} + \text{मिश्रित आय}

    2. घरेलू आय में विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय (NFIA) जोड़ें $\rightarrow$ राष्ट्रीय आय (NNP_{FC}) प्राप्त होगी।

  • सावधानियां: हस्तांतरण आय (पेंशन, दान, वजीफा) शामिल नहीं की जाती। लॉटरी या जुए से प्राप्त आय (Windfall gains) शामिल नहीं होती। शेयरों और बांड्स की बिक्री से प्राप्त आय शामिल नहीं होती क्योंकि यह केवल वित्तीय कागजों का लेन-देन है।

3. व्यय विधि (Expenditure Method)

इस विधि में एक लेखा वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को जोड़ा जाता है।

  • अंतिम व्यय के मुख्य घटक:

    1. निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure – C): परिवारों और निजी संस्थाओं द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर किया गया खर्च।

    2. सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (Government Final Consumption Expenditure – G): सरकार द्वारा प्रशासनिक और कल्याणकारी सेवाओं पर किया गया खर्च।

    3. सकल घरेलू पूंजी निर्माण या निवेश व्यय (Gross Domestic Capital Formation – I): इसमें सकल स्थायी पूंजी निर्माण (मशीनें, भवन) और इन्वेंटरी निवेश (स्टॉक में परिवर्तन) शामिल होते हैं।

    4. शुद्ध निर्यात (Net Exports – X-M): यह निर्यात (Exports) और आयात (Imports) का अंतर है।

  • राष्ट्रीय आय निकालने के चरण:

    1. इन चारों घटकों को जोड़ें $\rightarrow$ इससे GDP_{MP} प्राप्त होगा।

      सूत्र: GDP_{MP} = C + G + I + (X – M)

    2. GDP_{MP} में से ‘मूल्यह्रास’ और ‘शुद्ध अप्रत्यक्ष कर’ (NIT) घटाएं \rightarrow घरेलू आय (NDP_{FC}) प्राप्त होगी।

    3. इसमें NFIA जोड़ें \rightarrow राष्ट्रीय आय (NNP_{FC}) प्राप्त होगी।

  • सावधानियां: मध्यवर्ती वस्तुओं पर किया गया व्यय शामिल नहीं किया जाता। पुरानी वस्तुओं की खरीद पर किया गया व्यय शामिल नहीं होता। शेयरों और डिबेंचर पर किया गया व्यय शामिल नहीं होता।


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