झारखंड सरकार के कर्मचारियों के लिए शिशु देखभाल अवकाश (Child Care Leave – CCL): संपूर्ण नियमावली एवं अद्यतन जानकारी (2024-2026)
प्रस्तावना एवं पृष्ठभूमि
किसी भी राज्य के विकास में वहां के सरकारी कर्मचारियों का बहुमूल्य योगदान होता है। कर्मचारियों के कल्याण और उनके पारिवारिक जीवन को संतुलित रखने के लिए समय-समय पर सरकार द्वारा कई नीतियां बनाई जाती हैं। इसी दिशा में झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम उठाते हुए राज्य की महिला और एकल पुरुष कर्मचारियों के लिए ‘शिशु देखभाल अवकाश’ (Child Care Leave – CCL) का प्रावधान लागू किया है।
यह निर्णय छठे केंद्रीय वेतन आयोग (6th Central Pay Commission) की अनुशंसाओं और भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इस आलेख में हम झारखंड सेवा संहिता, 2000 में किए गए नए संशोधनों, दिनांक 14 मार्च 2024 को जारी मूल संकल्प और दिनांक 23 मार्च 2026 को जारी वेतन संबंधी अद्यतन संशोधन का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
भाग 1: शिशु देखभाल अवकाश (CCL) का ऐतिहासिक संदर्भ
झारखंड सरकार हमेशा से अपने कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों की भांति वेतनमान और अन्य सुविधाएं देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत रही है।
मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश का पूर्व विस्तार: इससे पूर्व, वित्त विभाग के संकल्प संख्या 551/वि (दिनांक 01.03.2007) और संकल्प ज्ञापांक 1997/वि (दिनांक 01.07.2010) के माध्यम से राज्य सरकार ने महिला कर्मियों के मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की सीमा में वृद्धि की थी। साथ ही, पुरुष कर्मियों के लिए पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) का भी प्रावधान किया गया था।
केंद्र सरकार का मॉडल: भारत सरकार ने 11 सितंबर 2008 और बाद में 30 अगस्त 2019 के कार्यालय ज्ञापांक के माध्यम से केंद्र की महिला और एकल पुरुष कर्मचारियों के लिए 730 दिनों के ‘शिशु देखभाल अवकाश’ की व्यवस्था की थी।
झारखंड में मांग और स्वीकृति: राज्य की महिला कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से केंद्र के अनुरूप CCL की मांग की जा रही थी। अंततः 06 मार्च 2024 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक (मद संख्या 11) में इसे स्वीकृति मिली और 14 मार्च 2024 (ज्ञापांक 732) को इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया। इसके तहत झारखंड सेवा संहिता 2000 के नियम 220 के बाद नया नियम 220(A) जोड़ा गया है।
भाग 2: शिशु देखभाल अवकाश की पात्रता और प्रमुख शर्तें (2024 का मूल संकल्प)
झारखंड सरकार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, शिशु देखभाल अवकाश की अवधि, पात्रता और शर्तें निम्नलिखित रूप से निर्धारित की गई हैं:
- कौन ले सकता है यह अवकाश? (पात्रता)
महिला कर्मचारी: राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सभी महिला कर्मचारी इस अवकाश की पात्र हैं।
एकल पुरुष कर्मचारी (Single Male Employee): समाज की बदलती संरचना को ध्यान में रखते हुए, एकल पुरुष अभिभावक (जिसमें अविवाहित, विधुर या तलाकशुदा पुरुष शामिल हैं) को भी बच्चों की देखभाल के लिए यह सुविधा प्रदान की गई है।
- अवकाश की अवधि और आयु सीमा
कुल 730 दिन: यह अवकाश संपूर्ण सेवा अवधि के दौरान अधिकतम 2 वर्ष (यानी 730 दिन) के लिए दिया जा सकेगा।
अधिकतम दो संतान: यह सुविधा 18 वर्ष से कम आयु की केवल दो जीवित संतानों के लिए ही अनुमन्य होगी।
उद्देश्य: बच्चों की परीक्षा के समय उनकी तैयारी करवाने, बीमारी की स्थिति में या सामान्य पालन-पोषण व देखभाल के लिए यह अवकाश लिया जा सकता है।
दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष छूट: निशक्त (Disabled) बच्चों के मामले में 18 वर्ष की आयु सीमा का नियम लागू नहीं होगा। उनके लिए कभी भी यह अवकाश लिया जा सकता है।
- अवकाश लेने के नियम और प्रशासनिक शर्तें
इस अवकाश को लागू करने के लिए सरकार ने 14 सूत्रीय नियम बनाए हैं, जो इस प्रकार हैं:
अधिकार के रूप में दावा नहीं: इस छुट्टी को अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता। सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की पूर्वानुमति और विधिवत मंजूरी के बिना कोई भी कर्मचारी छुट्टी पर प्रस्थान नहीं कर सकता।
मंजूरी की आवृत्ति (Frequency): एक कैलेंडर वर्ष (Calendar Year) के दौरान यह अवकाश अधिकतम तीन (3) बार ही मंजूर किया जाएगा।
न्यूनतम अवधि: हर बार जब भी यह अवकाश लिया जाएगा, तो वह कम से कम 15 दिनों का होना चाहिए। 15 दिन से कम अवधि के लिए CCL मंजूर नहीं की जाएगी।
छुट्टियों का समायोजन: इस अवकाश के दौरान यदि कोई शनिवार, रविवार या राजपत्रित (Gazetted) छुट्टी आती है, तो उसे भी शिशु देखभाल अवकाश की गिनती में शामिल किया जाएगा।
- अन्य छुट्टियों और सेवाकाल (Service Rules) के साथ संबंध
अर्जित अवकाश (Earned Leave) के समतुल्य: CCL को अर्जित अवकाश के समान माना जाएगा और उसी प्रक्रिया के तहत मंजूर किया जाएगा।
छुट्टी खाते (Leave Account) से कोई कटौती नहीं: संबंधित कर्मचारी के छुट्टी खाते में भले ही कितने भी उपार्जित अवकाश (PL/EL) शेष हों, फिर भी CCL मंजूर की जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CCL को कर्मचारी के सामान्य छुट्टी खाते से काटा (विकलित) नहीं जाएगा।
अन्य छुट्टियों के साथ संयोजन: इस अवकाश के साथ कोई अन्य देय छुट्टी भी मंजूर की जा सकती है। लेकिन, यदि CCL की निरंतरता में कोई अन्य छुट्टी मांगी जाती है, तो उसके लिए सरकारी चिकित्सक द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य हो सकता है।
अलग छुट्टी लेखा: शिशु देखभाल अवकाश का एक अलग ‘छुट्टी लेखा’ विहित प्रपत्र में संधारित किया जाएगा और इसे कर्मचारी की सेवा-पुस्तिका (Service Book) के साथ अनिवार्य रूप से संलग्न रखा जाएगा।
- परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के दौरान नियम
सामान्य परिस्थितियों में परिवीक्षा अवधि (Probation) के दौरान काम कर रहे कर्मचारियों को यह अवकाश मंजूर नहीं किया जाएगा।
केवल अत्यंत कठिन और विशेष परिस्थितियों में ही इसे मंजूर किया जा सकता है, बशर्ते छुट्टी मंजूर करने वाले प्राधिकारी को इसकी आवश्यकता के प्रति पूर्ण रूप से संतुष्टि हो जाए।
यदि परिवीक्षा काल में यह अवकाश लिया जाता है, तो कर्मचारी की परिवीक्षा अवधि उतने समय (जितने दिन का अवकाश लिया गया है) के लिए आगे बढ़ (विलंबित हो) जाएगी।
भाग 3: अवकाश के दौरान छुट्टी वेतन का अद्यतन नियम (2026 का संशोधन)
14 मार्च 2024 को जब मूल संकल्प जारी हुआ था, तब अवकाश के दौरान मिलने वाले ‘छुट्टी वेतन’ (Leave Salary) को लेकर स्थिति यह थी कि कर्मचारी को छुट्टी पर जाने से ठीक पहले मिलने वाला वेतन प्राप्त होगा। लेकिन केंद्र सरकार के अद्यतन नियमों के अनुरूप वेतन निर्धारण का मामला राज्य सरकार के विचाराधीन था।
इसके समाधान के लिए वित्त विभाग ने 23 मार्च 2026 को संकल्प ज्ञापांक-39 जारी किया, जिसे 12 मार्च 2026 की राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक (मद संख्या 21) में मंजूरी मिली थी।
नया वेतन नियम (कंडिका 3(xv) का समावेश):
इस नए आदेश के अनुसार, अब 730 दिनों के शिशु देखभाल अवकाश (CCL) को दो भागों में बांटकर वेतन का भुगतान किया जाएगा:
पहले 365 दिनों के लिए: कर्मचारी को 100% छुट्टी वेतन (Full Leave Salary) देय होगा।
अगले 365 दिनों के लिए: कर्मचारी को मूल छुट्टी वेतन का 80% (80% Leave Salary) ही देय होगा।
यह संशोधन केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 30 अगस्त 2019 के ज्ञापन के ठीक अनुरूप किया गया है, ताकि राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के बीच समानता बनी रहे।
निष्कर्ष एवं प्रभाव
झारखंड सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी ये दोनों संकल्प (2024 और 2026) राज्य की कार्यबल (Workforce) नीति में एक प्रगतिशील बदलाव का प्रतीक हैं।
इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
महिला सशक्तिकरण और नौकरी में ठहराव: अक्सर देखा गया है कि बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं या उनकी गंभीर बीमारियों के समय महिला कर्मचारियों को मजबूरन अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती थी या अवैतनिक लंबी छुट्टियां लेनी पड़ती थीं। CCL के 730 दिनों के प्रावधान से महिलाओं का ‘करियर ब्रेक’ रुकेगा।
एकल पिताओं के लिए संजीवनी: विधुर या तलाकशुदा पुरुष, जो अकेले अपने बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उनके लिए यह नियम अत्यंत राहत भरा है।
पारिवारिक और मानसिक स्वास्थ्य: कर्मचारी बिना अपनी नौकरी की चिंता किए अपने बच्चों के महत्वपूर्ण विकासशील वर्षों में उनके साथ खड़ा रह सकेगा, जिससे पारिवारिक तनाव में कमी आएगी और कार्यस्थल पर उनकी उत्पादकता (Productivity) भी बढ़ेगी।
अंततः, राज्य सरकार के सचिव प्रशांत कुमार के आदेशानुसार इन दोनों संकल्पों को झारखंड राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित करने और महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सहित सभी विभागाध्यक्षों को प्रेषित करने का निर्देश दे दिया गया है। यह नया नियम झारखंड सेवा संहिता 2000 को आधुनिक और कर्मचारी-हितैषी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – शिशु देखभाल अवकाश (CCL)
प्रश्न 1: क्या पुरुष कर्मचारी भी शिशु देखभाल अवकाश (CCL) ले सकते हैं?
उत्तर: हाँ, लेकिन सभी पुरुष कर्मचारी नहीं। केवल ‘एकल पुरुष’ कर्मचारी (जैसे- अविवाहित, विधुर या तलाकशुदा पुरुष) जो अकेले अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं, वे इस अवकाश के पात्र हैं।
प्रश्न 2: CCL के दौरान मुझे कितना वेतन मिलेगा?
उत्तर: 23 मार्च 2026 के नए संशोधित नियम के अनुसार:
छुट्टी के पहले 365 दिनों के लिए आपको अपना 100% छुट्टी वेतन मिलेगा।
बचे हुए अगले 365 दिनों के लिए आपको अपने छुट्टी वेतन का 80% ही मिलेगा।
प्रश्न 3: क्या मैं एक बार में 5 या 10 दिन की CCL ले सकता/सकती हूँ?
उत्तर: नहीं। नियमानुसार, आप जब भी शिशु देखभाल अवकाश लेंगे, तो वह एक बार में कम से कम 15 दिनों का होना चाहिए। इससे कम अवधि के लिए यह छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी।
प्रश्न 4: एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम कितनी बार CCL ली जा सकती है?
उत्तर: एक कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के दौरान आप अधिकतम तीन (3) बार ही शिशु देखभाल अवकाश ले सकते हैं।
प्रश्न 5: क्या छुट्टी के बीच में पड़ने वाले रविवार या राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holidays) भी CCL में गिने जाएंगे?
उत्तर: हाँ। छुट्टी की अवधि के बीच में आने वाले शनिवार, रविवार या कोई भी अन्य राजपत्रित छुट्टी शिशु देखभाल अवकाश (CCL) का ही हिस्सा मानी जाएगी और वे आपकी कुल 730 दिनों की सीमा में से कटेंगे।
प्रश्न 6: क्या मेरी अर्जित छुट्टियां (Earned Leaves/PL) खत्म होने के बाद ही मुझे CCL मिलेगी?
उत्तर: नहीं। आपके छुट्टी खाते में अर्जित अवकाश (Earned Leave) बचे होने के बावजूद भी आपको शिशु देखभाल अवकाश मंजूर किया जा सकता है। CCL आपके नियमित छुट्टी खाते से नहीं काटी जाती है; इसके लिए एक अलग खाता (Leave Account) बनाया जाता है।
प्रश्न 7: क्या प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि के दौरान काम कर रहे नए कर्मचारियों को यह छुट्टी मिल सकती है?
उत्तर: सामान्य परिस्थितियों में प्रोबेशन अवधि के दौरान यह अवकाश नहीं दिया जाता है। अत्यंत विशेष या कठिन परिस्थिति होने पर ही सक्षम प्राधिकारी इसे मंजूर कर सकते हैं। यदि आप प्रोबेशन के दौरान यह छुट्टी लेते हैं, तो आपकी प्रोबेशन अवधि छुट्टी के दिनों की संख्या के बराबर आगे बढ़ (विलंबित हो) जाएगी।
प्रश्न 8: क्या मैं इस छुट्टी को अपना अधिकार मानकर कभी भी ले सकता/सकती हूँ?
उत्तर: नहीं, शिशु देखभाल अवकाश पर अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता। छुट्टी पर जाने से पहले अपने सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की पूर्वानुमति और विधिवत मंजूरी लेना अनिवार्य है।
(Disclaimer):
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है, इसे आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ न मानें। किसी भी नियम, वेतन या छुट्टी से जुड़े अंतिम निर्णय के लिए कृपया झारखंड सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी मूल आदेशों (संकल्प) का ही संदर्भ लें। शिशु देखभाल अवकाश (CCL) अधिकार नहीं है और इसकी स्वीकृति पूर्णतः सक्षम प्राधिकारी के अधीन है।

