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झारखण्ड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली 2026: सरकारी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध समाधान

झारखण्ड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली 2026: सरकारी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध समाधान

झारखण्ड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पदाधिकारियों की सेवा से जुड़ी शिकायतों और सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद मिलने वाले लाभों के निपटारे के लिए एक नया और पारदर्शी तंत्र स्थापित किया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, झारखण्ड के राज्यपाल ने एक नई नियमावली को मंजूरी दी है । इसे “झारखण्ड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली, 2026” नाम दिया गया है ।

यह नियमावली 18 मार्च 2026 को झारखण्ड गजट (असाधारण अंक) में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित की गई है और प्रकाशन की तिथि से ही पूरे राज्य में लागू हो गई है । इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य सेवा और सेवांत लाभों से जुड़े मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी और उत्तरदायी तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करना है ।

यह लेख झारखण्ड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली 2026 के बारे में एक विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। झारखण्ड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों (सेवारत और सेवानिवृत्त) की शिकायतों के समाधान के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था लागू की है।

यहाँ इस नई नियमावली के मुख्य बिंदुओं का सारांश दिया गया है:

  

मुख्य उद्देश्य और लागू होने की तिथि

  • प्रकाशन: 18 मार्च 2026 को झारखण्ड गजट में प्रकाशित।

  • उद्देश्य: सेवा और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों (Retirement Benefits) से जुड़ी शिकायतों का निष्पादन पारदर्शी और उत्तरदायी तरीके से करना।

कौन-कौन सी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं?

कर्मचारी या उनकी मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रित निम्नलिखित मामलों में शिकायत कर सकते हैं:

  • नियुक्ति और सेवा: नियुक्ति, सेवा सम्पुष्टि (Confirmation) और वरीयता (Seniority) निर्धारण।

  • वित्तीय मामले: वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि (Increment), भत्ते, ACP और MACP।

  • अवकाश: आकस्मिक अवकाश को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की छुट्टियां।

  • रिटायरमेंट लाभ: पेंशन, ग्रेच्युटी (Gratuity), ग्रुप बीमा, GPF और अर्जित अवकाश का नकद भुगतान।

क्या इस दायरे से बाहर है?

  • न्यायालय में लंबित (Sub-judice) मामले।

  • अनुशासनिक और विभागीय कार्यवाही।

  • तबादला (Transfer), पदस्थापन और प्रतिनियुक्ति।

  • RTI (सूचना का अधिकार) से जुड़े मामले।

शिकायत निवारण का ढांचा

  1. शिकायत निवारण पदाधिकारी (GRO): विभागों में उप सचिव और जिलों में SDO स्तर के अधिकारी।

  2. अपीलीय प्राधिकार: जिलों के लिए उपायुक्त (DC) और विभागों के लिए सचिव/प्रधान सचिव

महत्वपूर्ण समय-सीमा (Timeline)

चरण समय-सीमा
प्रारंभिक जाँच 03 कार्य दिवस
शिकायत निवारण (निर्णय) अधिकतम 60 कार्य दिवस
अपील करने की अवधि निर्णय के 30 दिनों के भीतर
अपील पर निर्णय अधिकतम 60 कार्य दिवस

विशेष प्रावधान

  • पारदर्शिता: सुनवाई दोनों पक्षों की मौजूदगी में होगी। निर्णय लिखित और तार्किक तथ्यों पर आधारित होगा।

  • जवाबदेही: यदि कोई अधिकारी निर्णय का पालन नहीं करता या देरी करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

  • प्रशिक्षण: अधिकारियों को राँची स्थित SKIPA के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा।


नियमावली के तहत कौन-सी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं?

राज्य सरकार के अधीन नियमित रूप से नियुक्त सेवारत एवं सेवानिवृत कर्मचारी/पदाधिकारी , या उनकी मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रित, निम्नलिखित मामलों के लिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

किन मामलों को इस नियमावली से बाहर रखा गया है?

कर्मचारियों को यह ध्यान रखना होगा कि कुछ विशेष मामलों को इस शिकायत निवारण तंत्र के दायरे से बाहर रखा गया है:

शिकायत निवारण तंत्र की संरचना: कौन सुनेगा आपकी शिकायत?

इस नियमावली के सुचारू संचालन के लिए विभाग और जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारियों को नामित करने का प्रावधान किया गया है:

  1. सेवा शिकायत निवारण पदाधिकारी (Grievance Redressal Officer):
  1. अपीलीय प्राधिकार (Appellate Authority):

यदि कोई कर्मचारी शिकायत निवारण पदाधिकारी के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह अपीलीय प्राधिकार के पास जा सकता है ।

शिकायत दर्ज करने की स्पष्ट प्रक्रिया

कोई भी नियमित पदाधिकारी या कर्मचारी, या उनकी मृत्यु पर उनका आश्रित, अपनी शिकायत लिखित आवेदन के रूप में दर्ज करा सकता है । इसके लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

प्रारंभिक जाँच और सुनवाई की प्रक्रिया

शिकायत प्राप्त होने के बाद अधिकारी द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है:

समय-सीमा और निर्णय (Time-limit & Decision)

अपील करने का अधिकार (Right to Appeal)

यदि कर्मचारी 60 दिनों के बाद आए निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह अपील कर सकता है:

अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रशिक्षण

यह नियमावली सिर्फ नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जवाबदेही भी तय की गई है:

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):

यह जानकारी ‘झारखण्ड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली, 2026’ की आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है । इसका उद्देश्य केवल कर्मचारियों को नियमों और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा सामान्य जानकारी प्रदान करना है।किसी भी प्रकार की आधिकारिक शिकायत दर्ज करने, अपील करने या विभागीय प्रक्रिया के लिए कृपया झारखण्ड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा जारी मूल राजपत्र और संबंधित आधिकारिक निर्देशों को ही अंतिम और सर्वमान्य समझें ।प्रस्तुत सामग्री का उपयोग किसी भी प्रकार के कानूनी दावे या आधिकारिक साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता है।

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