झारखण्ड सरकार की ऐतिहासिक पहल: “स्कूल रूआर 2026” (Back to School Campaign)
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा राज्य के सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और विद्यालयों में उनका ठहराव सुनिश्चित करने के लिए “स्कूल रूआर 2026” (Back to School Campaign) की घोषणा की गई है । यह अभियान विशेष रूप से उन बच्चों पर केंद्रित है जो शिक्षा प्रणाली से बाहर रह गए हैं या बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं (ड्रॉपआउट) ।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव, श्री उमा शंकर सिंह (भा.प्र.से.) द्वारा 24 मार्च 2026 को जारी पत्रांक SMC/05/152/2021/1352 के माध्यम से राज्य के सभी उपायुक्तों और शिक्षा अधिकारियों को इस महाभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ।
यह लेख इस संपूर्ण अभियान की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों, लक्षित समूहों और इसके धरातलीय क्रियान्वयन की विस्तृत कार्ययोजना का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
अभियान की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
नयी शिक्षा नीति (NEP) की धारा-3 के तहत शिक्षा प्रणाली का मुख्य लक्ष्य छात्रों के छीजन (ड्रॉपआउट दर) को कम करना और सभी स्तरों पर शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच उपलब्ध कराना है । स्कूली शिक्षा का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों का नामांकन हो और वे नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहें ।
समग्र शिक्षा अभियान और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE) के तहत झारखण्ड राज्य ने प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर लगभग सार्वभौमिक नामांकन प्राप्त करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है । हालाँकि, विभाग द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि इन लगातार प्रयासों के बावजूद, ऊपरी कक्षाओं (उच्च प्राथमिक, माध्यमिक) में छात्रों के ठहराव को बनाए रखना अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है ।
झारखण्ड सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के सभी बच्चों का 100% नामांकन प्राप्त करना है । इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही अनामांकित और छीजित बच्चों की विद्यालय में पुर्नवापसी के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ।
“स्कूल रूआर 2026” के मुख्य उद्देश्य
इस अभियान को बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया है, जिसके निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं:
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आंगनबाड़ी से प्राथमिक विद्यालय में संक्रमण: 5+ आयु वर्ग के सभी बच्चों, जो वर्तमान में आंगनबाड़ी में हैं, उनका प्राथमिक विद्यालय की कक्षा 1 में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना ।
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नामांकित बच्चों की उपस्थिति: 5 से 18 आयु वर्ग के वे सभी बच्चे जिनका विद्यालय में नामांकन हो चुका है, उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना ।
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विद्यालय से बाहर (Out of School) बच्चों की वापसी: जो बच्चे विद्यालय से पूरी तरह बाहर रह गए हैं, उनका शत-प्रतिशत नामांकन कराना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना ।
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विशेष वर्गों पर ध्यान: अप्रवासी (Migrant) बच्चों, अनामांकित बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को खोजकर उनका विद्यालय में नामांकन और उपस्थिति दर्ज कराना ।
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कक्षाओं में प्रोन्नति और ठहराव: पिछले वर्षों में कक्षा 1 से 11 तक नामांकित सभी बच्चों का अगली कक्षाओं (कक्षा 2 से 12 तक) में शत-प्रतिशत नामांकन एवं उपस्थिति की पुष्टि करना ।
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डिजिटल ट्रैकिंग: सभी बच्चों की उपस्थिति को राज्य के ‘ई-विद्यावाहिनी’ (e-Vidyavahini) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज कराना और इसका नियमित अनुश्रवण (Monitoring) करना ।
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नव-नामांकित बच्चों पर विशेष ध्यान: जो बच्चे इस अभियान के तहत पहली बार या दोबारा नामांकित होंगे, उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति को बनाये रखना ।
अभियान के लक्षित समूह (Target Groups)
“स्कूल रूआर 2026” के अंतर्गत विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है:
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शिशु पंजी (Child Register) के सर्वेक्षण से प्राप्त छीजित (Dropouts) और अनामांकित (Unenrolled) बच्चे ।
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ड्रॉप बॉक्स (Drop Box) में रह गए बच्चे, अर्थात् वे बच्चे जिन्होंने एक स्तर की शिक्षा पूरी कर ली है लेकिन अगले स्तर के विद्यालय में नामांकन नहीं लिया है ।
अभियान की समयावधि और त्रि-स्तरीय प्रशासनिक कार्ययोजना
“स्कूल रूआर, 2026” कार्यक्रम 09 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 अप्रैल 2026 तक, कुल 21 दिनों तक पूरे राज्य में व्यापक रूप से चलाया जाएगा । इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर एक सुदृढ़ रणनीति तैयार की गई है:
1. राज्य स्तरीय रणनीति (09.04.2026)
अभियान की शुरुआत 09 अप्रैल 2026 को राज्य स्तर पर होगी। इस दिन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी । इस बैठक में सभी राज्य स्तरीय पदाधिकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) के प्रतिनिधि, सभी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक और शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी भाग लेंगे, जहाँ उन्हें संपूर्ण अभियान की विस्तृत रूपरेखा से अवगत कराया जाएग
2. जिला स्तरीय रणनीति (11.04.2026)
11 अप्रैल 2026 को सभी जिलों में उपायुक्त (Deputy Commissioner) की अध्यक्षता में बैठक होगी । इस बैठक में जनप्रतिनिधि, सभी विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, BDO, BEO, BRP/CRP, NGO प्रतिनिधि और पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के प्रतिनिधि शामिल होंगे । जिला स्तर पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे:
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डहर एप (Dahar App) का उपयोग: डहर एप से प्राप्त अनामांकित एवं छीजित बच्चों के आंकड़ों के आधार पर प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और कर्मियों को नामांकन की जिम्मेवारी सौंपी जाएगी ।
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आंकड़ों का विश्लेषण: UDISE डेटा का विश्लेषण कर गैप (Gap) की पहचान की जाएगी और नामांकन बढ़ाने की गतिविधियां तय की जाएंगी ।
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विद्यालयों की मैपिंग: एक निर्बाध संक्रमण (Seamless Transition) के लिए आंगनबाड़ी को प्राथमिक विद्यालय से, प्राथमिक को मध्य विद्यालय से, मध्य को उच्च विद्यालय से और उच्च को उच्चतर विद्यालय से मैप किया जाएगा । इससे कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में जाने वाले बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए प्रखंडवार रणनीति बनेगी ।
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समीक्षा एवं समन्वय: जिला MIS कोऑर्डिनेटर द्वारा GER (Gross Enrolment Ratio) और NER (Net Enrolment Ratio) पर चर्चा की जाएगी तथा ई-विद्यावाहिनी एवं SDMIS को अद्यतन करने पर जोर दिया जाएगा । साथ ही, PRI प्रतिनिधियों और गैर-सरकारी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर माता-पिता को प्रोत्साहित करने की योजना बनेगी ।
3. प्रखंड और संकुल स्तरीय रणनीति (13.04.2026)
13 अप्रैल 2026 को प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की अध्यक्षता में प्रखंड स्तरीय बैठक होगी, जिसमें जनप्रतिनिधियों और शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों के साथ संकुलवार (Cluster-wise) लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे । संकुल साधनसेवियों (CRPs) को सीधे तौर पर नामांकन की जिम्मेदारी दी जाएगी । यहाँ भी UDISE डेटा का संकुलवार विश्लेषण, विद्यालयों की मैपिंग और ई-विद्यावाहिनी पोर्टल को अद्यतन करने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे ।
विद्यालय स्तर पर 15 दिवसीय सघन अभियान (15.04.2026 से 30.04.2026)
संपूर्ण अभियान का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु राज्य के सभी विद्यालय होंगे । विद्यालय स्तर पर 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी ।
अभियान-पूर्व तैयारियां (Pre-Campaign Activities)
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आंगनबाड़ी से 5+ आयु वर्ग के बच्चों का प्राथमिक विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने की पूर्व तैयारी ।
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विद्यालय की अद्यतन बाल-पंजी के आधार पर 5 से 18 आयु वर्ग के विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों की गाँव/टोलावार सूची बनाकर प्रखंड को भेजना ।
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विद्यालय के विभिन्न क्लबों (जैसे प्रयास कार्यक्रम) के सदस्यों को लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों को वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपना ।
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गाँवों और टोलों में प्रभात फेरी निकालकर अभिभावकों को विद्यालय में नामांकन के लिए आमंत्रित करना ।
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टोलावार भ्रमण दलों का गठन करना जो सीधे परिवारों से संपर्क कर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करेंगे ।
माता समिति (सरस्वती वाहिनी) की विशेष भूमिका
इस अभियान में माता समिति अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी । प्रधानाध्यापक और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के साथ मिलकर माता समिति अनामांकित बच्चों का नामांकन कराएगी । माता समिति के सदस्य पोषक क्षेत्र के टोलों/मोहल्लों का आपस में बँटवारा करेंगे और घर-घर जाकर माताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर उनके बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करेंगे तथा नव-नामांकित बच्चों की उपस्थिति का ध्यान रखेंगे ।
दिवस-वार गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा
विद्यालय स्तर पर इस 15-दिवसीय अवधि के दौरान प्रतिदिन का एक निश्चित कैलेंडर तय किया गया है:
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पहला दिन: डहर एप से अनामांकित बच्चों की टोलावार सूची बनेगी। लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों को चिन्हित किया जाएगा। आंगनबाड़ी से प्राथमिक और प्राथमिक से उच्च कक्षाओं में जाने वाले बच्चों की सूची प्राप्त की जाएगी तथा पिछली कक्षा से अगली कक्षा में प्रोन्नति की समीक्षा होगी। किसी कारणवश प्रोन्नत नहीं हो पाए बच्चों के माता-पिता से संपर्क किया जाएगा ।
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दूसरा दिन: सार्वजनिक स्थलों पर अभियान से जुड़े सूचनात्मक पोस्टर लगाए जाएंगे। बाल संसद और शिक्षकों द्वारा पोषक क्षेत्र के अभिभावकों को नामांकन के लिए विद्यालय में ससम्मान आमंत्रित किया जाएगा ।
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तीसरा दिन: आंगनबाड़ी के 5+ आयु के बच्चों का प्राथमिक में नामांकन सुनिश्चित होगा। मध्य, उच्च और +2 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने निकटतम (निचले स्तर के) विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से समन्वय स्थापित कर ऐसे बच्चों की सूची प्राप्त करेंगे जिन्होंने अगली कक्षा (कक्षा 6, 9 या 11) में नामांकन नहीं लिया है ।
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चौथा और पांचवां दिन: तीसरी दिन की सूची के आधार पर छूटे हुए बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। हाउस कैप्टन की अध्यक्षता में अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा और पुराने पेपर्स का उपयोग कर किताबों और कॉपियों पर जिल्द चढ़ाने का कार्य होगा ।
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छठा और सातवां दिन: यह दिन स्वच्छता और पर्यावरण के नाम रहेगा। इको क्लब, स्पोर्ट्स क्लब, आर्ट एंड क्राफ्ट क्लब आदि के साथ मिलकर विद्यालय परिसर की साफ-सफाई होगी। प्रत्येक कक्षा में कूड़ेदान की व्यवस्था होगी और बच्चों को नीले और हरे डस्टबिन (Recyclable vs Unrecyclable) के उपयोग से कचरा प्रबंधन सिखाया जाएगा। विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की मदद से किचन गार्डन का निर्माण और वृक्षारोपण किया जाएगा ।
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आठवां दिन: नव-नामांकन की प्रक्रिया जारी रहेगी। छठी से बारहवीं कक्षा की छात्राओं के बीच माहवारी स्वच्छता (Menstrual Hygiene) के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, विद्यालय परिसर के आसपास नशीली दवाओं के उपयोग को रोकने पर चर्चा होगी। विशेष आवश्यकता वाले (CWSN) और अप्रवासी बच्चों के अभिभावकों से विशेष संपर्क किया जाएगा ।
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नौवां और दसवां दिन: जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए वाद-विवाद, क्विज, स्लोगन, पोस्टर और दीवार लेखन जैसी गतिविधियां होंगी। बच्चों के लिए विशेष मध्याह्न भोजन (Special MDM) का आयोजन किया जाएगा। दिव्यांग छात्रों के लिए पेयजल और शौचालय तक बाधारहित (Barrier-free) पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental wellbeing) के लिए योग आदि का संचालन किया जाएगा ।
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ग्यारहवां और बारहवां दिन: सभी हितधारकों (SMC, माता समिति, PRI प्रतिनिधि) के साथ बैठक कर नामांकन की सघन समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों द्वारा ‘होम विजिट’ (Home Visit) किया जाएगा ।
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तेरहवां दिन: छात्रों के लिए “नो बैग डे” (No Bag Day) का आयोजन होगा। इस दिन पढ़ाई की जगह किचन गार्डन/बागवानी जैसी रचनात्मक गतिविधियां होंगी और विशेष मध्याह्न भोजन दिया जाएगा। विद्यालय की चारदीवारी पर शैक्षिक मॉडल लगाए जाएंगे ।
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चौदहवां दिन: प्रखंड और जिला स्तरीय पदाधिकारी विद्यालयों का भ्रमण करेंगे। वे उपस्थिति बढ़ाने के लिए सुझाव देंगे। विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों के नामांकन की पुनः समीक्षा होगी और बचे हुए बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा ।
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पंद्रहवां और सोलहवां दिन (समापन समारोह): नव-नामांकित बच्चों के स्वागत की भव्य तैयारी होगी। समारोह में माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधि, पूर्ववर्ती छात्र और सरकारी पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा। शत-प्रतिशत उपस्थिति वाले बच्चों और उनके माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा। विशेष मध्याह्न भोजन के साथ स्वच्छता शपथ ग्रहण का आयोजन होगा, जिसमें विद्यालय के सभी छात्र, शिक्षक, SMC सदस्य और सरस्वती वाहिनी की सदस्याएं भाग लेंगी ।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नामांकन हेतु सामुदायिक जागरूकता पर आधारित पोस्टर तैयार किये जायेंगे । जिन मध्य, उच्च या उच्चतर विद्यालयों में नामांकन कम पाया जाएगा, वहां के प्रधानाध्यापकों की जवाबदेही तय करते हुए उनसे पत्राचार किया जाएगा ।
अधिकारियों के विशिष्ट दायित्व और अनुश्रवण प्रणाली
अभियान को कागजों से निकालकर धरातल पर सफल बनाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की गई है:
DEO एवं DSE की भूमिका:
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शिशुपंजी और डहर एप से प्राप्त डेटा के आधार पर प्रखंडवार सूची तैयार करना ।
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जिले में कार्यरत NGOs को अभियान से जोड़ना और प्रचार-प्रसार की तैयारी करना ।
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जिला परियोजना कार्यालय में अभियान अवधि के लिए एक विशेष ‘कोषांग’ (Cell) का गठन करना, जो प्रतिदिन बच्चों की उपस्थिति और गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार करेगा ।
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व्यक्तिगत रूप से विद्यालयों में जाकर बैठकों में भाग लेना और यह सुनिश्चित करना कि अभियान समाप्ति तक सभी बच्चों का विवरण ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर अद्यतन (Update) हो जाए ।
उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) की भूमिका:
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सांसदों, विधायकों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को इस महाभियान से जोड़ना ।
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जिले के सभी प्रशासनिक पदाधिकारियों को निर्देशित करना कि वे कम से कम दो विद्यालयों का अनिवार्य रूप से भ्रमण करें और अभियान को गति प्रदान करें ।
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स्वयं कम से कम एक या दो विद्यालयों का भ्रमण कर सभी भागीदारों को उपस्थिति नियमित करने का निर्देश देना और आम जनता से अपील करना ।
अनुश्रवण (Monitoring) और प्रोत्साहन
राज्य स्तर से ‘गूगल लिंक’ (Google Link) के माध्यम से संपूर्ण “स्कूल रूआर, 2026” कार्यक्रम का सतत अनुश्रवण (Continuous Monitoring) किया जाएगा । प्रखंड स्तर पर कार्यरत कर्मी प्रतिदिन की गतिविधियों का विद्यालयवार दस्तावेजीकरण करेंगे । सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए, शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने वाले विद्यालयों को प्रखंड स्तर से, प्रखंडों को जिला स्तर से और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को राज्य स्तर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा ।
दस्तावेजीकरण और जन-सहभागिता
प्रत्येक स्तर (विद्यालय, प्रखंड, जिला) पर संचालित गतिविधियों और सफलता की कहानियों (Best Practices) का अनिवार्य रूप से समेकन और दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिसे अंत में राज्य कार्यालय को प्रस्तुत किया जाएगा । प्रवासी और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों के ठहराव की एक विशेष सूची भी संधारित की जाएगी । अभियान को व्यापक बनाने के लिए जन सम्पर्क विभाग के माध्यम से समाचार पत्रों का उपयोग किया जाएगा और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत विभिन्न संस्थानों से सहयोग लिया जाएगा ।
निष्कर्ष
झारखण्ड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी यह “स्कूल रूआर 2026” अवधारणा पत्र महज़ एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य को संवारने की एक विस्तृत और सुविचारित कार्ययोजना है । एक बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव से लेकर विद्यालय स्तर की माता समिति तक, सभी की ऊर्जा को एक दिशा में केंद्रित करने का यह प्रयास नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को मूर्त रूप देने में मील का पत्थर साबित होगा । 21 दिनों का यह सघन अभियान न केवल बच्चों को स्कूलों में वापस लाएगा, बल्कि विद्यालयों के भौतिक और शैक्षणिक वातावरण (जैसे स्वच्छता, जल संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी शिक्षा) में भी एक अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा ।
(उपरोक्त सभी दिशा-निर्देश और कार्यक्रम की रूपरेखा पत्रांक SMC/05/152/2021/1352, दिनांक 24.03.2026 के सूचक (Indicative) प्रपत्र पर आधारित हैं.)