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झारखण्ड राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना: JHAROTEF की ऐतिहासिक पहल, 19-सूत्रीय महत्वपूर्ण सुझाव और कैशलेस चिकित्सा की दिशा में एक नया सवेरा

झारखण्ड राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना: JHAROTEF की ऐतिहासिक पहल, 19-सूत्रीय महत्वपूर्ण सुझाव और कैशलेस चिकित्सा की दिशा में एक नया सवेरा

प्रस्तावना:- एक महत्वाकांक्षी योजना का धरातल पर उतरना

झारखण्ड राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों और उनके आश्रितों के उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण को ध्यान में रखते हुए “राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना” (State Employees Health Insurance Scheme) लागू की गई है यह एक ऐसी महत्वकांक्षी योजना है जो पिछले कई वर्षों से लंबित थी इस योजना का लागू होना राज्य के माननीय मुख्यमंत्री जी की अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति और अटूट प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करता है । हालांकि, किसी भी वृहद और नई कल्याणकारी योजना के प्रारंभिक चरण में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां आनी स्वाभाविक हैं। इस योजना के तहत भी, प्रारंभिक चरण में लाभुक राज्यकर्मियों तथा उनके आश्रितों को इलाज के क्रम में कई तरह की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था

इन समस्याओं के स्थायी निराकरण और योजना को शत-प्रतिशत पारदर्शी एवं कर्मचारी-अनुकूल बनाने के लिए ‘झारखण्ड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (JHAROTEF) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की है JHAROTEF, जो कि ‘NMOPS, इंडिया’ का एक सहयोगी संगठन है, लगातार कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्षरत रहा है इस संदर्भ में फेडरेशन द्वारा एक विस्तृत प्रतिवेदन के साथ विभागीय अपर मुख्य सचिव महोदय के समक्ष कर्मचारियों के पक्ष को मजबूती से रखा गया था इस सकारात्मक पहल के फलस्वरूप ही विभाग द्वारा पूर्व में निर्गत संकल्प को संशोधित कर अधिकांश त्रुटियों के निराकरण का सफल प्रयास किया गया है

संशोधित संकल्प के अनुसार, इस महत्वकांक्षी योजना को अधिक सुलभ एवं उपयोगी बनाने के लिए झारखण्ड राज्य आरोग्य सोसायटी (JSAS) द्वारा विभिन्न विषयों पर अलग से एक विस्तृत ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SoP) जारी की जानी है इसी SoP को त्रुटिहीन और सर्वसमावेशी बनाने के उद्देश्य से JHAROTEF के प्रांतीय अध्यक्ष श्री विक्रांत कुमार सिंह द्वारा दिनांक 09.04.2026 को झारखण्ड राज्य आरोग्य सोसायटी, राँची के कार्यकारी निदेशक महोदय श्री छवि रंजन  को पत्रांक 9/2026 के माध्यम से एक विस्तृत अनुरोध पत्र सौंपा गया

09 अप्रैल 2026 की ऐतिहासिक शिष्टमंडलीय वार्ता और सकारात्मक आश्वासन

इस पत्र के आलोक में, दिनांक 09 अप्रैल 2026 को JHAROTEF के प्रांतीय अध्यक्ष श्री विक्रांत कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व में फेडरेशन का एक उच्च-स्तरीय शिष्टमंडल झारखण्ड राज्य आरोग्य सोसायटी (JSAS) के कार्यकारी निदेशक, श्री छवि रंजन जी से मिला। इस शिष्टमंडलीय वार्ता के दौरान झारखण्ड राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना की उन तमाम व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने को लेकर विस्तारपूर्वक और सकारात्मक चर्चा हुई, जिनका सामना आम कर्मचारी राज्य और देश के विभिन्न अस्पतालों में कर रहे हैं।

बैठक के दौरान फेडरेशन ने कार्यकारी निदेशक महोदय को अपने पत्र के माध्यम से 19 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव समर्पित किए । कार्यकारी निदेशक महोदय द्वारा इन सभी 19 बिंदुओं पर बिंदुवार और अत्यंत गहन चर्चा की गई। कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है कि निदेशक महोदय ने फेडरेशन के सभी सुझावों पर अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है और यह आश्वासन दिया है कि इन्हें शीघ्र ही लागू किया जाएगा।

उन्होंने शिष्टमंडल को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि “सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना देश की सबसे बेहतर स्वास्थ्य योजना के रूप में स्थापित हो, इसके लिए हम सब प्रयासरत हैं, जिसमें सामान्य कर्मचारियों एवं उनके प्रतिनिधियों का भी पूर्ण सहयोग जरूरी है।” उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने अपने संशोधित संकल्प में अधिकांश समस्याओं का समाधान पहले ही कर लिया है और अब इसे व्यावहारिक रूप से धरातल पर उतारने के लिए विभाग दिन-रात कार्य कर रहा है, जिसका सकारात्मक फलाफल बहुत जल्द ही सभी कर्मचारियों को देखने को मिलेगा।


JHAROTEF द्वारा प्रस्तुत 19-सूत्रीय महत्वपूर्ण सुझावों का विस्तृत एवं गहन विश्लेषण

कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, उन्हें दर-दर भटकने से बचाने और योजना को सही मायनों में ‘कैशलेस’ बनाने के लिए JHAROTEF ने निम्नलिखित 19 सुझाव विभाग को सौंपे हैं । आइए इन सुझावों के पीछे के कारणों और उनके संभावित लाभों का विस्तार से विश्लेषण करें:

1. डिजिटल ऐप और संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री की सुविधा

सुझाव: अधिकांश लाभुकों को योजना के तहत ईलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी नहीं है, इस हेतु एक ऐप डेवलप किया जाना चाहिए, साथ ही ईलाज का पूरा विवरण / मेडिकल हिस्ट्री यहाँ उपलब्ध हो

विश्लेषण: आज के डिजिटल युग में सूचना का अभाव सबसे बड़ी बाधा है। जब कोई कर्मचारी या उसका परिजन बीमार पड़ता है, तो वह पहले से ही मानसिक तनाव में होता है। ऐसे में यदि उसे कागजी प्रक्रियाओं और नियमों की जानकारी न हो, तो उसका शोषण होने की संभावना बढ़ जाती है। एक समर्पित मोबाइल ऐप के निर्माण से कर्मचारियों को योजना के सभी इम्पैनल्ड अस्पतालों, उपलब्ध पैकेजों, और नियमों की जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, ऐप में मरीज की ‘मेडिकल हिस्ट्री’ उपलब्ध होने से, आपातकालीन स्थिति में किसी नए डॉक्टर को भी मरीज की पृष्ठभूमि समझने में मदद मिलेगी, जिससे त्वरित और सटीक ईलाज संभव हो सकेगा।

2. सुरक्षित लॉगिन और OTP आधारित 

सुझाव: लाभुक को ईलाज हेतु OTP एवं बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के माध्यम से लॉग इन तथा रजिस्टर करने का प्रावधान होना चाहिए

विश्लेषण: स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में फर्जीवाड़े और पहचान की चोरी (Identity Theft) को रोकना एक बड़ी चुनौती होती है। JHAROTEF का यह सुझाव न केवल व्यवस्था को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और वैध राज्यकर्मी या उनके आश्रितों को ही मिले। OTP (वन टाइम पासवर्ड) और बायोमेट्रिक (जैसे फिंगरप्रिंट या आधार आधारित वेरिफिकेशन) के माध्यम से अस्पताल के रिसेप्शन पर ही मरीज की पहचान तुरंत सत्यापित हो जाएगी, जिससे लंबी कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।

3. संपूर्ण कैशलेस चिकित्सा (दवा और सर्जरी दोनों)

सुझाव: कई मामलों में कैशलेस की संकल्पना व्यवहारिक न होकर घटनोत्तर स्वीकृति जैसी है। इस योजना के तहत मेडिसीन एवं शल्य चिकित्सा दोनों के लिए कैशलेस सुविधा होनी चाहिए

विश्लेषण: यह योजना की सबसे बड़ी व्यावहारिक खामी की ओर इशारा करता है। कई बार अस्पतालों में मरीजों से कहा जाता है कि वे पहले अपने पैसे से दवाइयां खरीदें या सर्जरी का खर्च उठाएं, और बाद में विभाग से उसका ‘Reimbursement’ (घटनोत्तर स्वीकृति/प्रतिपूर्ति) करवा लें। एक सामान्य वेतनभोगी कर्मचारी के लिए अचानक लाखों रुपये की व्यवस्था करना असंभव होता है। फेडरेशन की यह स्पष्ट मांग है कि चाहे वह ओपीडी की महंगी दवाइयां हों या कोई जटिल शल्य चिकित्सा (सर्जरी), मरीज को अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं देना पड़े; यह पूरी तरह से कैशलेस होना चाहिए।

4. प्रक्रियाओं की समयबद्धता और सुगमता

सुझाव: अस्पताल, JSAS एवं बीमा कम्पनी के मध्य Bona-fide User Verification, Treatment Package Approval, Bill Raising and Payment की समयबद्धता एवं सुगमता होनी चाहिए

विश्लेषण: अक्सर देखा गया है कि मरीज को अस्पताल से छुट्टी (Discharge) मिलने के बाद भी बीमा कंपनी और अस्पताल के बीच बिल के अप्रूवल में कई घंटे या कभी-कभी दिन लग जाते हैं। मरीज अस्पताल में बंधक सा महसूस करता है। इसके अतिरिक्त, इलाज शुरू करने से पहले ‘ट्रीटमेंट पैकेज’ के अप्रूवल में देरी से मरीज की जान पर बन आती है। JHAROTEF ने मांग की है कि इन तीनों संस्थाओं (अस्पताल, JSAS, और बीमा कंपनी) के बीच एक मजबूत IT इंफ्रास्ट्रक्चर हो, जिससे वेरिफिकेशन, अप्रूवल और पेमेंट की प्रक्रिया एक निर्धारित समय-सीमा (Timebound) के भीतर पूरी हो सके।

5. मजबूत और जवाबदेह शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System)

सुझाव: Grievance Redressal System में चैटबॉट, वाट्सअप, एसएमएस एवं ईमेल के माध्यम से स्टेप बाई स्टेप शिकायत निवारण की सुविधा होनी चाहिए, जिसमें हर स्टेप के लिए एक नियत समय निर्धारित हो एवं जिसकी अवहेलना होने पर संबंधित पर कार्रवाई सुनिश्चित हो

विश्लेषण: यदि किसी अस्पताल द्वारा मरीज को योजना का लाभ देने से मना किया जाता है या अतिरिक्त पैसों की मांग की जाती है, तो उस समय मरीज असहाय महसूस करता है। इस स्थिति से निपटने के लिए एक बहुआयामी शिकायत प्रणाली की आवश्यकता है। चैटबॉट, व्हाट्सएप, एसएमएस और ईमेल जैसे त्वरित संचार माध्यमों से मरीज अपनी शिकायत तुरंत दर्ज करा सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सुझाव में ‘जवाबदेही’ (Accountability) की मांग की गई है। यदि निर्धारित समय में अधिकारी समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो उन पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

6. इलाज के डेटा और खर्च का Carry Forward (निरंतरता)

सुझाव: एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किये जाने पर तबतक किये गये ईलाज की हिस्ट्री (पैथोलॉजी/डायग्नोसिस सहित) एवं तबतक हुए खर्च का ब्यौरा Carry Forward हो

विश्लेषण: कई बार एक छोटे अस्पताल में मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसे बड़े सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में रेफर किया जाता है। ऐसे में नए अस्पताल में दोबारा सारे ब्लड टेस्ट, एमआरआई, सीटी स्कैन आदि किए जाते हैं, जिससे न केवल मरीज को शारीरिक कष्ट होता है, बल्कि बीमा राशि (Sum Insured) का एक बड़ा हिस्सा व्यर्थ के टेस्ट में खर्च हो जाता है। डेटा ‘कैरी फॉरवर्ड’ होने से पुरानी रिपोर्ट्स का उपयोग किया जा सकेगा और इलाज में निरंतरता (Continuity of Care) बनी रहेगी।

7. पेंशनर्स के लिए प्रीमियम रिन्यूअल की सुलभ सुविधा

सुझाव: पेंशनर्स के लिए प्रति वर्ष प्रिमियम Renewal करने हेतु ECS Mandate / UPI Subscription Renewal का प्रावधान होना चाहिए

विश्लेषण: राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारी (पेंशनर्स) प्रायः वृद्ध होते हैं और उनके लिए हर साल बैंकों या कार्यालयों के चक्कर लगाना शारीरिक रूप से कष्टदायक होता है। ECS (Electronic Clearing Service) मैंडेट या UPI ऑटो-पे सब्सक्रिप्शन की सुविधा से उनके बैंक खाते से प्रीमियम की राशि स्वतः ही कट जाएगी और उनकी पॉलिसी बिना किसी रुकावट के रिन्यू हो जाएगी। यह ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में एक बेहतरीन कदम है।

8. कामकाजी आश्रितों के कवरेज का विस्तार

सुझाव: वैसे आश्रित जो केन्द्र सरकार अथवा दूसरे राज्यों के कर्मी अथवा पेंशनभोगी हैं उन्हें भी योजना से आच्छादित किया जाना चाहिए

विश्लेषण: अक्सर नियमों में यह पेंच होता है कि यदि राज्यकर्मी का जीवनसाथी या आश्रित किसी अन्य सरकारी सेवा (केंद्र या अन्य राज्य) में है, तो उन्हें इस योजना से बाहर कर दिया जाता है। JHAROTEF का मानना है कि पारिवारिक स्वास्थ्य सुरक्षा एक समग्र विषय है। यदि राज्य सरकार प्रीमियम ले रही है, तो परिवार के सभी सदस्यों को बिना किसी भेदभाव के इस बेहतरीन योजना के छाते के नीचे लाया जाना चाहिए।

9. पुलिस बल के लिए विशेष और संवेदनशील प्रावधान

सुझाव: लाभूकों विशेष कर पुलिस बल को गोली/माईन्स/ग्रेनेड ब्लास्ट से घायल होने पर इस योजना का लाभ मिलना चाहिए

विश्लेषण: झारखण्ड एक ऐसा राज्य है जहां आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद (नक्सलवाद) एक बड़ी चुनौती रही है। राज्य पुलिस के जवान जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में अपनी जान की बाजी लगाकर ड्यूटी करते हैं। कई बार उग्रवादी हमलों में पुलिसकर्मियों को गोली लगती है या वे बारूदी सुरंग (Landmines) और ग्रेनेड ब्लास्ट का शिकार हो जाते हैं। ऐसे वीरों को इलाज के लिए किसी भी कागजी औपचारिकता में नहीं उलझाना चाहिए। उन्हें तत्काल और सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ योजना का कैशलेस लाभ मिलना चाहिए। यह सुझाव पुलिस बल के मनोबल को ऊंचा रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

10. त्वरित ऑनलाइन अग्रिम (Advance) प्रक्रिया

सुझाव: अग्रिम प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया Online एवं त्वरित होंनी चाहिए

विश्लेषण: कुछ विशिष्ट या गैर-सूचीबद्ध बीमारियों के इलाज के लिए कर्मचारियों को विभाग से मेडिकल एडवांस लेना पड़ता है। वर्तमान व्यवस्था में फाइलें कई मेजों से होकर गुजरती हैं, जिसमें हफ्तों लग जाते हैं। चिकित्सा आपातकाल में समय ही जीवन होता है। JHAROTEF की यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत है कि एडवांस की पूरी फाइलिंग, ट्रैकिंग और अप्रूवल की प्रक्रिया को पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया जाए, ताकि 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज के परिजनों को फंड मिल सके।

11. गंभीर बीमारियों (Critical Illnesses) की सूची का विस्तार

सुझाव: Asthama with ABPA-CB with B/L Bronchiectasis (Bilateral) सहित अन्य और बिमारियों को गंभीर बिमारियों की सूची में जोड़ा जाना चाहिए

विश्लेषण: स्वास्थ्य विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है और नई-नई जटिल बीमारियां सामने आ रही हैं। ‘एबीपीए’ (Allergic bronchopulmonary aspergillosis) के साथ अस्थमा और ‘बाइलेटरल ब्रोंकिइक्टेसिस’ फेफड़ों की एक बेहद जटिल और जानलेवा स्थिति है, जिसके इलाज में भारी खर्च आता है। ऐसी जटिल बीमारियों को सामान्य बीमारियों की सूची से हटाकर ‘गंभीर बीमारियों’ (Critical Illnesses) की सूची में डालना चाहिए ताकि मरीज को विशेष पैकेज और उच्च बीमा राशि का लाभ मिल सके।

12. एयर एम्बुलेंस (Air Ambulance) की त्वरित स्वीकृति

सुझाव: क्रिटीकल मामलों में एयर एम्बुलेन्स की स्वीकृति की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए

विश्लेषण: ब्रेन हेमरेज, गंभीर हार्ट अटैक या मल्टी-ऑर्गन फेल्योर जैसी स्थितियों में झारखण्ड से मरीजों को अक्सर दिल्ली, चेन्नई या हैदराबाद के बड़े अस्पतालों में एयरलिफ्ट करना पड़ता है। एयर एम्बुलेंस का खर्च लाखों में होता है। यदि इसकी स्वीकृति में घंटों का विलंब होता है, तो मरीज ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour – इलाज का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती समय) खो देता है। इस प्रक्रिया को ‘रेड टेप’ (लालफीताशाही) से मुक्त कर त्वरित नोडल अधिकारी स्तर पर स्वीकृत करने का प्रावधान होना चाहिए।

13. अस्पतालों का संपूर्ण इम्पैनलमेंट (Empanelment)

सुझाव: कई अस्पतालों में उपलब्ध सभी विभाग/प्रभाग (सुविधाएं) योजना के तहत इम्पैनल्ड नहीं हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी अस्पताल का कार्डियोलॉजी विभाग अनूसुचित है तो उसी अस्पताल का नेफ्रोलॉजी या न्यूरोलॉजी विभाग लिस्टेड नहीं रहता है

विश्लेषण: यह मरीजों के लिए सबसे भ्रमित करने वाली स्थिति होती है। मरीज अस्पताल का नाम सूची में देखकर वहां भर्ती हो जाता है। मान लीजिए वह दिल की बीमारी के लिए भर्ती हुआ, लेकिन इलाज के दौरान उसकी किडनी (नेफ्रोलॉजी) या मस्तिष्क (न्यूरोलॉजी) पर असर पड़ता है। तब अस्पताल प्रबंधन कहता है कि ये विभाग योजना में शामिल नहीं हैं और इनका बिल नकद देना होगा। JHAROTEF ने बहुत ही सूझबूझ के साथ इस खामी को पकड़ा है और मांग की है कि यदि कोई अस्पताल सूचीबद्ध होता है, तो उसके सभी विभाग और सुविधाएं स्वतः योजना के तहत कैशलेस होनी चाहिए।

14. जागरूकता हेतु अनिवार्य सूचना पट्ट (Display Board)

सुझाव: इम्पैनल्ड अस्पतालों में “इस अस्पताल में राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कैशलेश ईलाज की सुविधा उपलब्ध है” का बोर्ड लगा होना चाहिए

विश्लेषण: कई बार इम्पैनल्ड अस्पताल होने के बावजूद, अस्पताल का निचला स्टाफ मरीजों को जानकारी नहीं देता और नकद बिल बनाने का दबाव डालता है। अस्पताल के रिसेप्शन, कैजुअल्टी और बिलिंग काउंटर पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में यह बोर्ड लगा होना अनिवार्य होना चाहिए। इससे मरीजों में जागरूकता आएगी और अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगेगी।

15. प्री एवं पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन (Pre and Post Hospitalization) सुविधा

सुझाव: बीमा के दायरे में आने वाली सभी बिमारियों के ईलाज में Pre-Hospitalization (पैथोलॉजिकल टेस्ट) तथा Post-Hospitalization (नर्सिंग) की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए

विश्लेषण: किसी भी मरीज का इलाज केवल अस्पताल में भर्ती होने के दिनों तक सीमित नहीं होता। भर्ती होने से पहले डॉक्टर कई तरह के महंगे पैथोलॉजिकल टेस्ट (जैसे MRI, Biopsy, Blood panels) लिखते हैं। इसी तरह, सर्जरी के बाद घर पर महीनों तक नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी और दवाओं की आवश्यकता होती है। एक आदर्श स्वास्थ्य बीमा में मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 60 या 90 दिन बाद तक का पूरा खर्च कवर होना चाहिए।

16. देश के प्रतिष्ठित संस्थानों (Premier Institutes) में सुगम ऑनलाइन सुविधा

सुझाव: संशोधित संकल्प के अनुसार देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों जैसे CMC वेल्लोर, AIG हैदराबाद आदि में उस अस्पताल के दर पर ही ईलाज की सुविधा दी गई है, इन अस्पतालों में कैशलेश सुविधा सुगम, त्वरित एवं पूरी तरह से ऑनलाईन होनी चाहिये

विश्लेषण: क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) वेल्लोर और एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (AIG) हैदराबाद जैसे संस्थान देश के गौरव हैं, जहां दूर-दराज से लोग इलाज के लिए आते हैं। सरकार ने अपने संशोधित संकल्प में एक बहुत अच्छा कदम उठाया है कि राज्यकर्मी वहां उस अस्पताल की तय दरों पर इलाज करा सकते हैं। लेकिन, JHAROTEF की चिंता यह है कि वहां भी मरीजों को लंबी कागजी कार्यवाही में न फंसना पड़े। इसके लिए इन बड़े संस्थानों के साथ राज्य आरोग्य सोसायटी का सीधा API/ऑनलाइन इंटीग्रेशन होना चाहिए।

17. जेनेरिक दवाओं (Generic Medicines) को प्राथमिकता

सुझाव: कई अस्पतालों द्वारा अधिक मूल्य की दवाओं को Prescribe किया जाता है, राज्यहित में Generic Medicines एवं National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) द्वारा संचालित Sahi Daam App पर सूचित दवाओं को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए

विश्लेषण: यह सुझाव JHAROTEF की दूरदर्शिता को दर्शाता है। निजी अस्पताल अक्सर कमीशन के चक्कर में महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिखते हैं, जिससे बीमा पैकेज की राशि जल्दी खत्म हो जाती है और अंततः इसका नुकसान मरीज और राज्य सरकार के खजाने को होता है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के ‘सही दाम ऐप’ (Sahi Daam App) का उपयोग करने और जेनेरिक (समान साल्ट वाली सस्ती) दवाओं को अनिवार्य करने से बीमा फंड का सदुपयोग होगा और अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सकेगा।

18. हृदय रोग (Cardiology) से जुड़ी प्रक्रियाओं में स्पष्टता

सुझाव: हृदयरोग के मामले में स्पष्टता नहीं होने के कारण हार्ट ब्लॉकेज एवं पेसमेकर इम्पलान्टेशन के मामले में अस्पताल द्वारा इसमें असमर्थता जतायी जाती है जबकि यह कार्डियोलॉजी में बहुप्राय बिमारी की श्रेणी में आता है

विश्लेषण: कार्डियोलॉजी विभाग में हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी (स्टेंट डालना), हार्ट ब्लॉकेज खोलना, या धड़कन को नियंत्रित करने के लिए पेसमेकर (Pacemaker) लगाना सबसे सामान्य और जीवन रक्षक प्रक्रियाएं हैं। यदि SoP (मानक संचालन प्रक्रिया) में इन उपकरणों (Consumables/Implants) के स्पष्ट पैकेज रेट नहीं होंगे, तो अस्पताल मरीजों को वापस लौटा देंगे। फेडरेशन की यह मांग बहुत ही तार्किक है कि हृदय रोग से जुड़े हर छोटे-बड़े प्रत्यारोपण को योजना में बिना किसी संशय के स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।

19. देश के शीर्ष 24 सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों को जोड़ना

सुझाव: संशोधित संकल्प के कंडिका 4 (II) (b) में अंकित अस्पतालों के अलावे निम्नांकित 24 प्रतिष्ठित अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाना चाहिए

विश्लेषण: राज्य के बाहर बेहतर चिकित्सा के लिए, JHAROTEF ने अखिल भारतीय स्तर के शीर्ष अस्पताल समूहों और क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की एक सूची विभाग को सौंपी है । इस सूची में शामिल अस्पताल ये सुनिश्चित करेंगे कि झारखण्ड के कर्मचारियों को देश की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा तकनीक का लाभ मिल सके:

  • राष्ट्रीय अस्पताल शृंखलाएं (Multi-Super Speciality): अपोलो ग्रुप (Apollo Group), फोर्टिस ग्रुप (Fortis Group), मैक्स ग्रुप (Max Group), मेदांता ग्रुप (Medanta Group), नारायणा ग्रुप (Narayana Group), मणिपाल ग्रुप (Manipal Group), और केयर ग्रुप (Care Group) के देश भर के सभी अस्पतालों को शामिल करने की मांग की गई है

  • दिल्ली/NCR क्षेत्र: आर्टेमिस अस्पताल (Artemis Hospital, Gurugram) और सर गंगा राम अस्पताल (Sir Ganga Ram Hospital, New Delhi)

  • हैदराबाद (चिकित्सा का हब): KIMS अस्पताल, यशोदा अस्पताल (Yashoda Hospitals), और कॉन्टिनेंटल अस्पताल (Continental Hospital) को मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी के लिए नेत्र रोग के लिए विश्व प्रसिद्ध एल वी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट (LV Prasad Eye Institute – LVPEI)

  • चेन्नई एवं दक्षिण भारत: लीवर ट्रांसप्लांट (Liver transplants) जैसी जटिल सर्जरी के लिए ग्लेनीगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल्स (Gleneagles Global Hospitals, Chennai) इसके अलावा SIMS अस्पताल (Chennai) और बेंगलुरु का प्रतिष्ठित सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (St. John medical College and hospital, Bengaluru) मदुरै का अरविंद आई हॉस्पिटल (Aravind Eye Hospital)

  • पूर्वी भारत एवं पड़ोसी राज्य: चूंकि झारखण्ड के लोग अक्सर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जाते हैं, इसलिए कोलकाता का ILS अस्पताल (Dumdum) और मालदा का सोनोस्कैन (Sonoscan, Malda) ओडिशा के भुवनेश्वर से सम अल्टीमेट अस्पताल (Sum Ultimate Hospital) और कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (KIMS) राउरकेला से हाईटेक अस्पताल (Hitech Hospital) और आईवीएफ (IVF Specialist) के लिए शांति मेमोरियल अस्पताल (Shanti Memorial Hospital) बिहार की राजधानी पटना से पारस अस्पताल (Paras Hospital, Patna)

इन सभी 24 अस्पतालों के जुड़ने से झारखण्ड के राज्यकर्मी देश के किसी भी कोने में उत्कृष्ट चिकित्सा प्राप्त करने में सक्षम होंगे।


JHAROTEF: एक सशक्त नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचा

इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे JHAROTEF के मजबूत संगठनात्मक ढांचे का हाथ है। ‘झारखण्ड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (JHAROTEF) के पदाधिकारियों की सूची उनके लेटरहेड पर स्पष्ट रूप से अंकित है, जो यह दर्शाती है कि यह संगठन राज्य के हर कोने और हर विभाग के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है

JHAROTEF  के प्रांतीय अध्यक्ष श्री विक्रांत कु० सिंह के कुशल मार्गदर्शन में यह फेडरेशन कार्य कर रहा है संगठन की रीढ़ के रूप में प्रांतीय महासचिव श्री उज्जवल तिवारी, प्रान्तीय कोषाध्यक्ष श्री नितिन कुमार, मुख्य संगठन सचिव श्री रविन्द्र चौधरी, प्रांतीय संयोजक श्री आनन्द किशोर साहू और मुख्य समन्वयक श्री अरविन्द कुमार लगातार रणनीति बना रहे हैं

संगठन को वैचारिक और रणनीतिक मजबूती प्रदान करने के लिए मुख्य सलाहकार श्री सुनील कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अमित कुमार महतो एवं श्री आनन्द राज खलखो निरंतर सक्रिय हैं महिला कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए महिला प्रकोष्ठ अध्यक्षा श्रीमति सुधा शर्मा और महिला प्रकोष्ठ सचिव श्रीमति शमां परवीन अहम भूमिका निभा रही हैं

विभिन्न प्रमंडलों और विभागों में समन्वय स्थापित करने के लिए उपाध्यक्षों की एक बड़ी टीम है, जिसमें श्री पंकज कुमार सिंह, श्री लाल बिहारी यादव, डॉ० सुधांशु कुमार सिंह, श्री राजेन्द्र प्रसाद, श्री ब्रजमोहन यादव, श्री विकास कुमार, श्री मुकेश चन्द्र पासवान, श्री काशिनाथ महतो, श्री रमेश उराँव, श्री मनोरंजन कुमार, और श्री अविनाश कुमार मिश्रा शामिल हैं

फेडरेशन की नीतियों और मांगों को मीडिया और जनता तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य मुख्य प्रवक्ता श्री दिनेश कु० शुक्ला, मुख्य मिडिया प्रभारी श्री सुमित कुमार नंद और मुख्य सोशल मिडिया प्रभारी श्री राकेश कुमार कर रहे हैं प्रांतीय मिडिया प्रभारी के रूप में डॉ० शिवानन्द कांशी एवं श्री दिलिप कुमार राय तथा प्रांतीय सोशल मिडिया प्रभारी श्री रामविलास पासवान, श्री उपेन्द्र सिंह और श्रीमती शिल्पी कुजूर भी इस संचार नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं प्रांतीय प्रवक्ता श्रीमती शिल्पा सुहासिनी और श्रीमती अर्पिता चटर्जी संगठन का पक्ष दमदारी से रखती हैं

इसके अतिरिक्त, संयुक्त महासचिव श्री लोकेश कुमार एवं श्री सुरेन्द्र कुमार के साथ-साथ उपमहासचिवों की एक विस्तृत टीम—डॉ० अमरेश कुमार, श्री संजय कुमार, श्री सुखदेव शर्मा, श्री आशिष कुमार, श्री रजनीश शुक्ला, श्री मुरलीधर रजक, श्री ब्रजेश भट्ट, श्री लालेश्वर राम, डॉ० सुनिल कुमार कश्यप, श्री शिवनारायण महतो, तथा श्री मनोरंजन कुमार—लगातार जमीन पर काम कर रही है सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रभारी श्री जय होरो और प्रांतीय कार्यालय सचिव श्री संतोष कुमार चौधरी एवं श्री सुनील फ्रांसिस खलखो संघ कार्यालय (ITI, हेहल, राँची, झारखण्ड, 834005) के माध्यम से संगठन के दैनिक कार्यों का सुचारू रूप से संचालन कर रहे हैं

निष्कर्ष: एक सुनहरे भविष्य की ओर

झारखण्ड राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना केवल एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं है; यह लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों की जीवन रेखा (Lifeline) है। 08 अप्रैल 2026 को JHAROTEF द्वारा प्रस्तुत यह 19-सूत्रीय ज्ञापन और इसके बाद 09 अप्रैल 2026 को JSAS के कार्यकारी निदेशक के साथ हुई सफल वार्ता ने इस योजना की सभी बाधाओं को दूर करने का एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है।

यदि झारखण्ड राज्य आरोग्य सोसायटी (JSAS) इन सभी व्यावहारिक सुझावों को अपनी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) में ईमानदारी से शामिल कर लेती है, तो कोई कारण नहीं है कि झारखण्ड की यह स्वास्थ्य बीमा योजना पूरे भारतवर्ष के अन्य राज्यों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ न बन जाए। ऐप के माध्यम से सरलीकरण, संपूर्ण कैशलेस सुविधा, गंभीर बीमारियों का विस्तार, देश के 24 सर्वश्रेष्ठ सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की सूची में प्रविष्टि, और एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली—ये सभी कदम मिलकर कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक तनाव से मुक्ति दिलाएंगे। राज्य के कर्मचारी अब उस शुभ दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब ये सभी संशोधित नियम धरातल पर पूरी तरह से लागू होंगे और कोई भी कर्मचारी या उसका परिवार इलाज के अभाव में या धन की कमी के कारण दर-दर भटकने को मजबूर नहीं होगा। JHAROTEF की यह पहल निश्चित रूप से कर्मचारी कल्याण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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