झारखण्ड सरकार का कड़ा कदम: सरकारी कोष से अवैध निकासी रोकने हेतु नए दिशानिर्देश
झारखण्ड सरकार के वित्त विभाग ने सरकारी कोष से हो रही करोड़ों रुपये की अवैध निकासी और वेतन घोटालों को गंभीरता से लेते हुए विपत्रों (Bills) की निकासी के संदर्भ में नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं । वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार द्वारा 08 अप्रैल 2026 को यह पत्र राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और कोषागार पदाधिकारियों को प्रेषित किया गया है ।
इस पत्र का मुख्य आधार प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), झारखण्ड के कार्यालय द्वारा 02 अप्रैल 2026 को दी गई वह सूचना है, जिसने राज्य प्रशासन में बड़ी वित्तीय खामियों को उजागर किया है ।
1. करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का खुलासा
पत्र में राज्य के दो प्रमुख पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालयों में हुए भारी वित्तीय गबन का स्पष्ट उल्लेख किया गया है:
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बोकारो: यहाँ मई 2024 से दिसम्बर 2025 की अवधि के बीच वेतन मद से कुल 3,15,33,993/- (तीन करोड़ पन्द्रह लाख तैंतीस हजार नौ सौ तिरान्वे) रुपये की अवैध निकासी की गई ।
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हजारीबाग: वित्त विभाग द्वारा डेटाबेस की समीक्षा में यह बात सामने आई कि इस कार्यालय से पिछले आठ वर्षों के दौरान 15,41,41,485/- (पंद्रह करोड़ इकतालीस लाख इकतालीस हजार चार सौ पच्चासी) रुपये की भारी-भरकम अवैध निकासी की गई है ।
2. घोटाले का तरीका (Modus Operandi) और विभागीय त्रुटियाँ
इन मामलों की जाँच और समीक्षा के दौरान कार्यालय स्तर पर कई गंभीर और हैरान करने वाली त्रुटियाँ संज्ञान में आई हैं, जिनका लाभ उठाकर इन घोटालों को अंजाम दिया गया:
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फर्जी कर्मियों को भुगतान: सेवानिवृत्त कर्मियों या ऐसे कर्मियों को वेतन का भुगतान किया गया जिनका उस कार्यालय से कोई वास्ता ही नहीं था । इसके लिए कार्यालय की पंजियों (Registers) से कोई मिलान नहीं किया गया ।
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डेटा से छेड़छाड़: बोकारो के मामले में तो एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के GPF (General Provident Fund) प्रोफाइल में जन्मतिथि ही बदल दी गई, ताकि उसे एक कार्यरत कर्मी के रूप में दिखाकर वेतन का भुगतान किया जा सके ।
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अनुमान्य से अधिक वेतन: कर्मियों को वेतन भुगतान से पूर्व उनके वास्तविक वेतनमान (Pay Scale) या भत्तों की जाँच ही नहीं की गई । बोकारो और हजारीबाग के मामलों में संबंधित व्यक्तियों को उनके अनुमान्य वेतन से कहीं अधिक राशि हर महीने दी जा रही थी ।
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बैंक खातों में हेराफेरी: संबंधित कार्यालय के विपत्र लिपिक (Bill Clerk) ने सरकारी सिस्टम में अपनी पत्नी या संबंधियों के बैंक खाते का विवरण डाल दिया था, जिससे सरकारी राशि लगातार उन खातों में ट्रांसफर हो रही थी ।
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OTP साझा करने में लापरवाही: * सितम्बर 2025 से पूर्व, विपत्र लिपिक और निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) दोनों का OTP एक ही मोबाइल नंबर पर प्राप्त हो रहा था, जो सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल अनुचित था ।
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सितम्बर 2025 के बाद जब आधार आधारित मोबाइल नंबर पर OTP भेजने की व्यवस्था लागू हुई, तब भी DDO द्वारा अपना OTP विपत्र लिपिक के साथ साझा (Share) किया जा रहा था ।
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लिपिकों का एक ही पद पर जमे रहना: इन मामलों में विपत्र लिपिक पिछले 10 से 12 वर्षों से एक ही कार्यालय में जमे हुए थे । इतने लंबे समय तक एक ही जगह काम करने के कारण उनके द्वारा किए जा रहे इन संदिग्ध कार्यों पर किसी की नज़र नहीं गई ।
3. भविष्य की रोकथाम हेतु कड़े दिशानिर्देश
भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए वित्त विभाग ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने के सख्त निर्देश दिए हैं:
क. वेतन भुगतान से पूर्व अनिवार्य सत्यापन
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प्रत्येक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) को स्थापना कर्मी का नाम, पदनाम, जन्म तिथि और अन्य आवश्यक सूचनाओं का मिलान अनिवार्य रूप से उनकी सर्विस बुक (Service Book) से करना होगा ।
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भुगतान से पहले पदाधिकारी को यह भी संतुष्ट होना होगा कि वह कर्मी वास्तव में कार्यालय में कार्यरत है ।
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सभी कर्मियों का वेतन भुगतान केवल उनके पक्ष में निर्गत ‘Payslip’ या सर्विस बुक में अंकित लेखा सत्यापन के आधार पर ही किया जाएगा ।
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वेतन भुगतान से पूर्व कर्मियों के बैंक खाता संख्या का सत्यापन उनकी पासबुक या बैंक चेक के आधार पर निश्चित रूप से किया जाना चाहिए ।
ख. अनिवार्य प्रमाणपत्र (Certificate) व्यवस्था
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उपरोक्त तीनों बिन्दुओं (कर्मी का सत्यापन, पे-स्लिप मिलान और बैंक खाता सत्यापन) के अनुपालन के संबंध में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) को विपत्र (Bill) पर एक सर्टिफिकेट अंकित करना अनिवार्य होगा ।
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इस सर्टिफिकेट के बिना कोषागार (Treasury) से किसी भी प्रकार के वेतन की निकासी नहीं की जा सकेगी ।
ग. सिस्टम सुरक्षा और प्रशासनिक फेरबदल
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निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) द्वारा किसी भी परिस्थिति में अपना OTP किसी अन्य कर्मी के साथ साझा नहीं किया जाएगा ।
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यदि कोई विपत्र लिपिक किसी DDO के साथ 3 साल से अधिक समय से कार्यरत है, तो उसे हटाकर किसी अन्य लिपिक को यह कार्य आवंटित किया जाए ।
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यदि किसी कार्यालय में केवल एक ही लिपिक कार्यरत है, तो उसके कार्यों पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए ।
4. तकनीकी बदलाव और सख्ती
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए संबंधित पोर्टल पर आवश्यक रोक (Restrictions) लगाने की तकनीकी कार्रवाई की जा रही है । इन प्रावधानों में किसी भी प्रकार की छूट केवल विशेष परिस्थितियों में कोषागार एवं सांस्थिक वित्त निदेशालय (Directorate of Treasuries and Institutional Finance) से पूर्व आदेश प्राप्त करने के बाद ही दी जा सकेगी ।
अंत में, सचिव द्वारा सभी पदाधिकारियों से इन बिंदुओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि राज्य के खजाने को इस प्रकार की सेंधमारी से सुरक्षित रखा जा सके ।
Disclaimer (अस्वीकरण):
यह लेख “झारखण्ड सरकार का कड़ा कदम: सरकारी कोष से अवैध निकासी रोकने हेतु नए दिशानिर्देश” विषय पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों एवं उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। आधिकारिक निर्णय या कार्यवाही से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना या वेबसाइट से पुष्टि अवश्य करें। लेख में किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा।

