झारखण्ड राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना में ऐतिहासिक संशोधन: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई संजीवनी
प्रस्तावना
झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों (पेंशनभोगियों) के स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। 9 जनवरी 2026 को जारी एक नए संकल्प (Resolution) के माध्यम से ‘राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना’ में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य पुरानी व्यवस्था की खामियों को दूर करना और कैशलेस व सुगम चिकित्सा सुविधाओं को हर लाभार्थी तक पहुँचाना है।
यह लेख इस नए संकल्प पत्र के हर उस पहलू और प्रावधान का विस्तृत विश्लेषण करता है, जो झारखण्ड के राज्य कर्मियों के लिए जानना आवश्यक है।
संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी? (पृष्ठभूमि)
राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना को पूरे राज्य में 1 मार्च 2025 से लागू किया गया था, और पुरानी चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Reimbursement) व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया था। योजना का मूल उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में तत्काल कैशलेस चिकित्सा लाभ प्रदान करना था।
हालाँकि, इसके क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आईं:-
- बीमा के तहत पैकेजों की राशि का काफी कम होना।
- सभी रोगों की चिकित्सा का सूचीबद्ध न होना।
- कई बड़े अस्पतालों को राज्य सरकार द्वारा सूचीबद्ध किए जाने के बावजूद, बीमा कंपनियों द्वारा उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल न करना।
विभिन्न कर्मचारी संघों और पदाधिकारियों के अनुरोध और इन त्रुटियों के निराकरण के लिए ही राज्य सरकार ने यह नया और व्यापक संकल्प पारित किया है।
योजना के लाभार्थियों के दायरे में विस्तार
इस नए संकल्प के अनुसार योजना के लाभार्थियों (Beneficiaries) के वर्गीकरण में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- कैटेगरी ‘B’ का विस्तार: अब कैटेगरी B में उल्लिखित सभी कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मी और उनके आश्रित/पारिवारिक पेंशन प्राप्तकर्ता इस योजना के पूर्ण लाभार्थी होंगे।
- माननीय विधायकों के लिए प्रावधान: झारखण्ड विधानसभा के माननीय सदस्यों (MLAs) को अब कैटेगरी ‘A’ से हटाकर कैटेगरी ‘B’ में शामिल कर दिया गया है। यदि कोई माननीय सदस्य इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहता है, तो उनके लिए स्वास्थ्य विभाग के पुराने चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Reimbursement) नियम ही प्रभावी रहेंगे।
बीमा कंपनी न होने पर वैकल्पिक व्यवस्था (TPA)
सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि किसी कारणवश किसी बीमा कंपनी का चयन नहीं हो पाता है, तो कर्मचारियों का इलाज नहीं रुकेगा। ऐसी स्थिति में झारखण्ड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (JSAS) द्वारा निविदा (Tender) के माध्यम से ‘थर्ड पार्टी एश्योरेंस’ (TPA) का चयन कर योजना चलाई जाएगी। साथ ही, अगले तीन वर्षों के भीतर JSAS की क्षमता निर्माण (Capacity Building) की जाएगी ताकि वह सीधे TPA के माध्यम से योजना का संचालन कर सके।
चिकित्सा दरें और शीर्ष अस्पतालों की सूची
कैटेगरी ‘A’, ‘B’ और ‘C’ के लाभार्थियों के लिए चिकित्सा की दरों और अस्पतालों के चयन में बहुत स्पष्टता लाई गई है:
- CGHS दरों पर इलाज: JSAS द्वारा सभी चिकित्सा संस्थानों में केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) के अनुरूप प्रक्रिया और दरें निर्धारित की जाएंगी।
- सरकारी अस्पतालों में वास्तविक दर: केंद्र और राज्य के सभी सरकारी और स्वायत्त चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सा सुविधा वास्तविक भुगतान (Actual payment) के आधार पर दी जाएगी।
- देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों में इलाज: कुछ बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल जो CGHS दरों पर काम नहीं करते हैं, वहां कर्मचारियों के इलाज का खर्च उनके वास्तविक दर (Actual Rates) पर ही वहन किया जाएगा (बीमित राशि के अंतर्गत)। सरकार ने ऐसे 13 बड़े अस्पतालों की सूची जारी की है:
- CMC, वेल्लोर
- AIG, हैदराबाद
- टाटा ग्रुप के सभी अस्पताल
- ILBS, नई दिल्ली
- राजीव गांधी कैंसर संस्थान, रोहिणी, दिल्ली
- नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज, बेंगलुरु
- अपोलो अस्पताल, चेन्नई
- मेदांता, द मेडिसिटी, गुड़गांव
- इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, नई दिल्ली
- नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
- शंकर नेत्रालय, चेन्नई और कोलकाता
- नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु
- बी.एम. बिड़ला अस्पताल, कोलकाता
(नोट: भविष्य में आवश्यकतानुसार माननीय स्वास्थ्य मंत्री के अनुमोदन से इस सूची में और भी अस्पताल जोड़े जा सकते हैं।)
वार्ड की पात्रता और दरों में संशोधन की शक्ति
- वार्ड की श्रेणी: सभी लाभार्थियों को सरकारी या गैर-सरकारी अस्पतालों में सेमी-प्राइवेट (Semi Private) वार्ड में चिकित्सा की अनुमति होगी। यदि कोई प्राइवेट वार्ड लेता है, तो उसे सेमी-प्राइवेट और प्राइवेट वार्ड के बीच की राशि का भुगतान स्वयं करना होगा।
- आपातकालीन स्थिति: एक्सीडेंट या इमरजेंसी में यदि सेमी-प्राइवेट वार्ड खाली नहीं है, तो उच्च श्रेणी (Higher Ward) के वार्ड में भी इलाज की अनुमति होगी।
- दरों में संशोधन: यदि योजना लागू करने में कोई कठिनाई आती है, तो झारखण्ड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (JSAS) के पास यह शक्ति होगी कि वह CGHS दरों को संशोधित कर सके।
आपातकालीन सेवाएं और गंभीर बीमारियों के लिए विशेष प्रावधान (कैटेगरी A और B के लिए)
सरकार ने दुर्घटना, गंभीर बीमारियों और अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के लिए बेहद संवेदनशील और उदार नियम बनाए हैं:
- एयर एम्बुलेंस की सुविधा: यदि कोई कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है या मरणासन्न स्थिति में है, तो उसे तत्काल उच्चतर संस्थान में रेफर करने के लिए एयर एम्बुलेंस या वायुयान यात्रा की स्वीकृति दी जाएगी। इसका भुगतान JSAS के कॉर्पस फण्ड (Corpus Fund) से होगा।
- चिकित्सा सीमा: सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपये और चिह्नित गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति बीमा कंपनी द्वारा की जाएगी।
- कॉर्पस फंड से अतिरिक्त मदद: यदि इलाज का खर्च बीमित राशि (Insurance amount) से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त खर्च का भुगतान झारखण्ड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कॉर्पस फंड से किया जाएगा।
- OPD और फॉलो-अप: गंभीर बीमारियों और अंग प्रत्यारोपण के मामले में OPD, फॉलो-अप और दवाओं का खर्च वास्तविक दर पर ट्रस्ट मोड (Trust Mode) में कॉर्पस फंड से दिया जाएगा।
- यात्रा भत्ता (TA): मरीज के साथ जाने वाले एक सहचर (Attendant) के लिए रेल/वायुयान/रोड एम्बुलेंस के खर्च की प्रतिपूर्ति TA Rules के अनुसार कॉर्पस फंड से की जाएगी।
- आयुष चिकित्सा: गैर-आवासीय आयुष चिकित्सा (AYUSH) को भी मान्यता दी गई है, जिसका भुगतान CGHS दरों पर कॉर्पस फंड से होगा।
अग्रिम भुगतान (Medical Advance) और मुफ्त हेल्थ चेकअप
- 5 लाख तक का एडवांस: किसी भी आकस्मिक दुर्घटना या गंभीर बीमारी में इलाज के लिए JSAS के स्तर से अधिकतम 5 लाख रुपये तक का चिकित्सा अग्रिम (Medical Advance) दिया जा सकेगा (कैशलेस इलाज को छोड़कर)।
- मुफ्त वार्षिक चेकअप: 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी पदाधिकारियों/कर्मचारियों और उनके जीवनसाथी (Spouse) को प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में एक बार किसी भी सरकारी अस्पताल में मुफ्त मेडिकल चेक-अप की सुविधा मिलेगी।
अंतरिम व्यवस्था और एसओपी (SOP) का निर्माण
- विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे कॉर्पस फंड से भुगतान, शिकायत निवारण, एम्बुलेंस, और अग्रिम प्रावधान के लिए विस्तृत SOP अलग से जारी की जाएगी।
- जब तक नई बीमा कंपनी का चयन नहीं हो जाता, तब तक इलाज में हुए खर्च (CGHS दर पर) और वास्तविक दावे के बीच की अंतर राशि का भुगतान एक गठित समिति की अनुशंसा पर JSAS के कॉर्पस फंड से किया जाएगा।
निष्कर्ष
झारखण्ड सरकार का 9 जनवरी 2026 का यह संकल्प राज्य कर्मियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है। देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों को वास्तविक दरों पर सूची में शामिल करना, एयर एम्बुलेंस की सुविधा देना, कॉर्पस फंड का निर्माण और 5 लाख तक के अग्रिम की व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति अत्यंत गंभीर है। यह योजना अब सही मायने में एक ‘सुगम और बेहतर’ चिकित्सा सुविधा बन गई है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख “झारखण्ड राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना 2026” से संबंधित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी समय-समय पर सरकारी संशोधनों के अनुसार बदल सकती है। किसी भी निर्णय से पहले कृपया संबंधित झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिसूचना से जानकारी अवश्य सत्यापित करें। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक/प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।
ऑफिशल वेबसाइट लिंक 👉
https://sehis.jharkhand.gov.in/

