झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष: नई सुविधाएँ, अनुदान सीमा और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी
प्रस्तावना (Introduction) बीमारी या आकस्मिक दुर्घटना किसी भी व्यक्ति के जीवन में बिना बताए दस्तक दे सकती है। ऐसे कठिन समय में सबसे बड़ी चिंता आर्थिक मदद की होती है। झारखण्ड में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) ने अपने ‘शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष‘ के नियमों में ऐतिहासिक और बेहद राहत देने वाले बदलाव किए हैं।
परिषद् की 02वीं बैठक (दिनांक 30.11.2022) में लिए गए निर्णयों और समिति की अनुशंसा के आधार पर कई पुरानी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह कल्याण कोष क्या है, इसमें क्या नए बदलाव हुए हैं, कौन-कौन इसका लाभ उठा सकता है और इसके लिए आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है।
1. कल्याण कोष का प्रभाव क्षेत्र: किसे मिलेगा लाभ?
पहले इस कल्याण कोष का दायरा सीमित था, लेकिन नए संशोधनों के बाद इसे काफी व्यापक बना दिया गया है।
कौन-कौन हैं लाभार्थी?
- शिक्षक और कर्मचारी: झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सभी शिक्षक और कर्मचारी इस कोष के प्राथमिक लाभार्थी हैं।
- आश्रित सदस्य (Dependents): सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब यह अनुदान केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को भी इसमें शामिल किया गया है।
- आश्रितों की परिभाषा: आश्रित सदस्यों में निम्नलिखित को शामिल किया गया है:
- पति या पत्नी।
- पुत्र (25 वर्ष की आयु तक, बशर्ते वह बेरोजगार हो)।
- अविवाहित पुत्री।
- नाबालिग भाई और अविवाहित बहन।
- आश्रित माता-पिता।
(इन सभी आश्रितों को भी अब बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में सहायता/अनुदान राशि का लाभ प्रदान किया जाएगा।)
2. अधिकतम अनुदान सीमा में भारी वृद्धि (Increase in Grant Limit)
चिकित्सा में लगातार बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए जैक (JAC) ने एक बहुत ही व्यावहारिक कदम उठाया है।
- वर्ष 2014 में निर्धारित नियमों के अनुसार असाध्य (गंभीर) बीमारी और लघु चिकित्सा के लिए अधिकतम अनुदान सीमा 1,50,000 रुपये (एक लाख पचास हजार रुपये) तय की गई थी।
- वर्तमान समय की महंगाई और इलाज के खर्च को देखते हुए, विचार-विमर्श के बाद इस अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 3,00,000 रुपये (तीन लाख रुपये) कर दिया गया है। यह निश्चित रूप से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए एक बड़ी आर्थिक संजीवनी साबित होगा।
3. अनुदान प्राप्ति की समय सीमा और बाध्यताओं में ढील
पुराने नियमों के कारण कई बार कर्मचारियों को संकट के समय परेशानी का सामना करना पड़ता था। नए संशोधनों ने इन नियमों को लचीला (Flexible) बना दिया है:
- समय सीमा में कटौती: पहले नियम था कि यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी ने एक बार अनुदान प्राप्त कर लिया है, तो उसे अगले 5 वर्षों तक दूसरा अनुदान नहीं दिया जाएगा। अब इस 5 वर्ष की लंबी अवधि को घटाकर मात्र 2 वर्ष कर दिया गया है।
- मूल्यांकन कार्य की बाध्यता समाप्त: पहले अनुदान के लिए यह शर्त थी कि शिक्षक/कर्मचारी परिषद् द्वारा आयोजित परीक्षा या मूल्यांकन कार्य से जुड़ा हो। अब इस बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
- आकस्मिक दुर्घटना: अब किसी भी समय आकस्मिक दुर्घटना (Accident) घटने की स्थिति में बिना किसी पूर्व शर्त के अनुदान स्वीकृत किया जा सकेगा।
4. कोविड महामारी और लकवाग्रस्त मरीजों के लिए विशेष प्रावधान
बीते कुछ वर्षों में कोविड-19 ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए जैक (JAC) ने कुछ खास बीमारियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- गंभीर रोग की श्रेणी: चूंकि राज्य सरकार द्वारा कोविड महामारी और लकवा (Paralysis) से पीड़ित लोगों को अनुदान दिया जाता है, इसलिए अब परिषद् ने भी इन दोनों बीमारियों को ‘गंभीर रोग’ की श्रेणी में रखकर अनुदान स्वीकृत करने का निर्णय लिया है।
- अंतिम निर्णय: असाध्य रोगों के अतिरिक्त अन्य बीमारियों के उपचार के लिए प्राप्त आवेदनों (अभ्यावेदनों) पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार ‘कल्याण कोष समिति’ के पास सुरक्षित रखा गया है।
5. कल्याण कोष में योगदान की प्रक्रिया (Contribution to the Fund)
यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि इस कोष में पैसा कहाँ से आता है और इसकी संरचना क्या है:
- शिक्षकों का योगदान: पहले मूल्यांकन कार्य में लगे सभी शिक्षकों के पारिश्रमिक/मानदेय से 5% की कटौती की जाती थी, जिससे ‘शिक्षक कल्याण कोष’ चलता था और इसका लाभ केवल शिक्षकों को मिलता था।
- परिषद् कर्मियों का जुड़ाव: पहले परिषद् के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिलती थी। उन्हें इस कोष से जोड़ने के लिए ‘परिषद् शिक्षक कर्मचारी कल्याण कोष’ का गठन किया गया।
- सहयोग राशि: अब मूल्यांकन कार्य में लगे कर्मियों के पारिश्रमिक से प्राप्त राशि के बराबर ही परिषद् के कोष से उसी वित्तीय वर्ष में सहयोग राशि (Matching Contribution) जमा की जाती है, ताकि परिषद् के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस अनुदान का लाभ मिल सके।
6. प्रमाणकों की मान्यता: कौन से अस्पताल मान्य होंगे?
इलाज के बाद क्लेम (Claim) पास कराने के लिए सही अस्पतालों से इलाज कराना और सही प्रमाण पत्र (Certificates) देना सबसे जरूरी होता है। जैक (JAC) ने इस प्रक्रिया को भी बहुत स्पष्ट कर दिया है:
- आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य विभाग: आयुष्मान भारत योजना के तहत 1408 बीमारियों और ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ में स्वास्थ्य विभाग की सूची को मान्यता दी गई है।
- मान्य अस्पताल: अनुदान की स्वीकृति के लिए निम्नलिखित अस्पतालों के प्रमाणक मान्य होंगे:
- सभी सरकारी अस्पताल।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचीबद्ध अस्पताल।
- रजिस्टर्ड (पंजीकृत) नर्सिंग होम और अस्पताल।
- पंजीकृत MBBS चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाणक।
- आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों के प्रमाणक।
(नोट: यह आदेश सचिव, झारखण्ड अधिविद्य परिषद्, राँची के आदेश से 25/11/2023 को जारी किया गया है और पूर्व के सभी संबंधित आदेश इस हद तक संशोधित समझे जाएंगे।)
7. अनुदान प्राप्ति हेतु आवेदन प्रपत्र (प्रपत्र ‘क’) भरने की प्रक्रिया
यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो उसे ‘प्रपत्र क’ (Form A) भरना होगा। इस फॉर्म में निम्नलिखित जानकारियाँ देनी होती हैं:
- व्यक्तिगत विवरण: आवेदक का नाम, पिता/पति का नाम, स्थायी और पत्राचार का पता, मोबाइल नंबर।
- नौकरी का विवरण: वर्तमान पदस्थापन का स्थान, पदनाम, जन्म तिथि और नियुक्ति तिथि।
- बीमारी का विवरण: अनुदान प्राप्ति का आधार, किस रोग से पीड़ित हैं, कब से पीड़ित हैं और कहाँ-कहाँ इलाज हुआ है।
- बैंक विवरणी: अनुदान राशि प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का विवरण (IFSC कोड और शाखा के नाम सहित) देना अनिवार्य है।
- अनिवार्य संलग्नक (Documents):
- बीमारी की पुष्टि के लिए मेडिकल प्रमाण-पत्र।
- आधार कार्ड की कॉपी।
- आवेदक का एक पासपोर्ट साइज फोटो (जो जिला शिक्षा पदाधिकारी या सचिव, जैक द्वारा अभिप्रमाणित/Attested होना चाहिए)।
सत्यापन और अनुशंसा: आवेदन पत्र पर आवेदक के हस्ताक्षर के साथ-साथ संबंधित प्रधानाध्यापक (Headmaster) का हस्ताक्षर और मुहर होना अनिवार्य है। प्रधानाध्यापक को यह अनुशंसा करनी होती है कि वे आवेदक को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और बीमारी की तिथियों की पुष्टि करते हैं। अंत में, इसे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) या सचिव (जैक) द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित (Countersign) किया जाता है।
(चेतावनी: आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि यदि भविष्य में कोई भी सूचना गलत पाई जाती है, तो आवेदक के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।)
निष्कर्ष (Conclusion)
झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC) द्वारा ‘शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष’ में किए गए ये संशोधन सही मायनों में कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच (Safety Shield) का काम करेंगे। अनुदान सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख करना, आश्रितों को शामिल करना और 5 साल की बाध्यता को घटाकर 2 साल करना—ये सभी कदम शिक्षा जगत के कर्मियों के प्रति सरकार और परिषद् की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। यदि आप या आपके परिचित कोई जैक (JAC) कर्मचारी हैं, तो उन्हें इस कल्याणकारी योजना की जानकारी अवश्य दें।
आवेदन का प्रारूप

झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (JAC)
शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष से अनुदान प्राप्ति हेतु आवेदन प्रपत्र
प्रपत्र क
(क) आवेदक का नाम : ……………………………………………………………………
(ख) पिता/पति का नाम : ……………………………………………………………………
(ग) स्थायी पता :………………………………………………………..…………………
(घ) पत्राचार का पता :………………………………………………………..……………
मोबाइल नं० : ……………………………………………………………………………
(ङ) वर्तमान पदस्थापन का स्थान एवं पदनाम :…………………………………………
(च) आवेदक का जन्म तिथि : ………………………………………………………………
(छ) आवेदक का नियुक्ति तिथि : …………………………..…………………………………
(ज) अनुदान प्राप्ति का आधार :……………………………………………………….…………
(झ) किस रोग से पीड़ित है :………………………………………………………………………
(ञ) कब से पीड़ित है :………………………………………………………………………………
(ट) कहाँ-कहाँ इलाज हुआ है :………………………………………………………..…………
(ठ) बैंक खाता विवरण :
(आई०एफ०एस०सी० कोड, शाखा का नाम सहित)………………………………………………………..…………………………………
घोषणा (Declaration):
प्रमाणित किया जाता है कि उपरोक्त सूचनाएँ सही हैं। यदि भविष्य में उपयुक्त सूचनाओं में से कोई भी गलत पाया जाता है तो मेरे विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई प्रारम्भ की जा सकती है।
अनुशंसा (Recommendation):
अनुशंसा करने वाले पदाधिकारी का स्पष्ट अभिमत, जिसमें यह उल्लेख हो कि वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और किस तिथि से किस तिथि तक बीमार हैं।
संलग्नक :
बीमारी की पुष्टि के लिए मेडिकल प्रमाण-पत्र संलग्न किया जा रहा है।⸻
आवेदक का हस्ताक्षर : …………………………………………
प्रधानाध्यापक का हस्ताक्षर एवं मुहर
(अनुशंसा करने वाले प्रधानाध्यापक प्रतिहस्ताक्षरित)
जिला शिक्षा पदाधिकारी / सचिव (JAC)